NTA 90-Day Challenge: NEET पेपर लीक और UGC NET में गड़बड़ियों के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) पर परीक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। सरकार ने सुधार की पहल शुरू कर दी है, लेकिन एजेंसी के सामने समय की बड़ी चुनौती है। हर साल दिसंबर से NTA का नया परीक्षा सत्र शुरू हो जाता है। इसकी शुरुआत JEE Main के पहले सत्र के रजिस्ट्रेशन से होती है। ऐसे में परीक्षा व्यवस्था में जरूरी बदलाव करने और छात्रों का भरोसा वापस जीतने के लिए एजेंसी के पास करीब 90 दिनों का समय है।
NTA 90-Day Challenge: खुद को साबित करने की चुनौती-
NEET पेपर लीक के बाद NTA ने परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए कई कदम उठाए थे। लेकिन UGC NET में सामने आई गड़बड़ियों ने एक बार फिर एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए। अब NTA के सामने UGC NET के रद्द किए गए तीन विषयों की दोबारा परीक्षा कराने की चुनौती भी है। यह परीक्षा सितंबर में प्रस्तावित है।
NTA 90-Day Challenge: 50 अधिकारियों और 6 हजार विशेषज्ञों पर कार्रवाई-
NTA ने संविदा पर तैनात करीब 50 अधिकारियों और कर्मचारियों को हटा दिया है। इसके अलावा प्रश्नपत्र तैयार करने और अनुवाद जैसे कामों से जुड़े करीब 6 हजार विशेषज्ञों और प्रोफेसरों को भी पैनल से हटाया गया है। अब इनकी जगह नई नियुक्तियां की जा रही हैं। अगर नए कर्मचारियों और विशेषज्ञों की नियुक्ति में देरी हुई या चयन प्रक्रिया में खामियां रहीं, तो इसका असर आने वाली परीक्षाओं पर पड़ सकता है।
लगातार पेपर लीक से कटघरे में NTA-
2024 में NEET पेपर लीक के बाद NTA में सुधार के लिए डॉ. राधाकृष्णन समिति ने करीब 105 सिफारिशें दी थीं। इनमें से कुछ सिफारिशों को लागू भी किया गया, लेकिन इसके बावजूद 2026 में परीक्षा व्यवस्था में सेंध की घटनाएं सामने आईं। इसके बाद सरकार ने परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में हाईपावर कमेटी गठित की है। हालांकि, अब सिर्फ सिफारिशें बनाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उन्हें समय पर और प्रभावी तरीके से लागू करना भी जरूरी होगा।
NTA के सामने ये बड़ी चुनौतियां-
छात्रों का परीक्षा व्यवस्था पर भरोसा बहाल करना।
लीक और त्रुटियों से मुक्त प्रश्नपत्र तैयार करना।
सरकारी परीक्षा केंद्रों का चयन करना।
CBT परीक्षाओं के लिए मजबूत साइबर सुरक्षा व्यवस्था तैयार करना।
प्रश्नपत्रों के सुरक्षित परिवहन और समय प्रबंधन को बेहतर बनाना।
आउटसोर्स एजेंसियों और निजी कंपनियों के हस्तक्षेप को कम करना।
परीक्षा केंद्रों पर छात्रों की जांच-पड़ताल के पुख्ता इंतजाम करना।
राज्यों और स्थानीय प्रशासन के साथ बेहतर समन्वय करना।
मजबूत तकनीकी ढांचा और सुरक्षित सॉफ्टवेयर तैयार करना।
शिकायतों के समाधान के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाना।
नए अधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्ति के साथ उनका उचित प्रशिक्षण करना।
90 दिन में बड़ा बदलाव लाने की चुनौती-
NTA के सामने सबसे बड़ी चुनौती कम समय में पूरी परीक्षा व्यवस्था को मजबूत करना है। दिसंबर से नए परीक्षा सत्र की शुरुआत होने के कारण एजेंसी को उससे पहले साइबर सुरक्षा, प्रश्नपत्र सुरक्षा, स्टाफ और परीक्षा केंद्रों से जुड़े इंतजाम दुरुस्त करने होंगे। अब आने वाले करीब 90 दिन NTA के लिए बेहद महत्वपूर्ण होंगे। इसी दौरान यह तय होगा कि एजेंसी परीक्षा व्यवस्था में छात्रों का भरोसा किस हद तक वापस ला पाती है।
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