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देवेंद्र फडणवीस को मिली ‘वीटो पावर’, महाराष्ट्र में बदला 5 दशक पुराना नियम

 Fadnavis Veto Power:

Fadnavis Veto Power: महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के प्रशासनिक कामकाज से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है। ‘महाराष्ट्र सरकार के कामकाज के नियम, 2026’ के तहत मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को मंत्रियों के विभागीय फैसलों पर पहले से ज्यादा अधिकार मिल गए हैं। नए नियम के मुताबिक, मुख्यमंत्री किसी मंत्री के फैसले को पलट सकते हैं, अगर उन्हें लगता है कि ऐसा करना जनहित में जरूरी है। इसके साथ ही 1975 से लागू प्रशासनिक ढांचे में भी बदलाव हो गया है।

Fadnavis Veto Power: क्या है नया नियम-

नए नियम की धारा 13(5) मुख्यमंत्री को किसी मंत्री के फैसले में बदलाव करने की स्पष्ट शक्ति देती है। हालांकि, न्यायिक मामलों को इससे बाहर रखा गया है। इस बदलाव के बाद मुख्यमंत्री को सरकार के अलग-अलग विभागों के फैसलों पर ज्यादा नियंत्रण मिल गया है।

Fadnavis Veto Power: क्यों किया गया नियम में बदलाव-

यह बदलाव बॉम्बे हाई कोर्ट के 2023 के एक फैसले के बाद आया है। चंद्रपुर जिला केंद्रीय सहकारी बैंक में भर्ती से जुड़े मामले में तत्कालीन सहकारिता मंत्री अतुल सावे ने भर्ती प्रक्रिया को मंजूरी दी थी। बाद में तत्कालीन मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने इस प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी। मार्च 2023 में बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने मुख्यमंत्री के इस आदेश को रद्द करते हुए कहा था कि पुराने नियमों में मुख्यमंत्री को किसी मंत्री के विभागीय फैसले की समीक्षा या उसे बदलने का अधिकार नहीं था।

मुख्यमंत्री के अधिकार बढ़े-

नए नियमों के तहत मुख्यमंत्री किसी भी विभाग से जरूरी दस्तावेज मंगा सकते हैं। इसके अलावा महत्वपूर्ण मामलों को कैबिनेट के सामने रखने का अधिकार भी मुख्यमंत्री के पास रहेगा। कुछ मामलों में मंत्रियों की सहमति से ‘सर्कुलेशन’ के जरिए भी फैसला लिया जा सकता है, यानी हर मामले में औपचारिक कैबिनेट बैठक जरूरी नहीं होगी।

मुख्य सचिव की भूमिका भी मजबूत-

नए नियमों में मुख्य सचिव की भूमिका को भी अधिक महत्वपूर्ण बनाया गया है। अगर कोई प्रस्ताव कानून, सरकारी नीति या तय नियमों के खिलाफ जाता है तो शीर्ष अधिकारी मुख्यमंत्री या संबंधित मंत्री को सलाह दे सकते हैं। इससे प्रशासनिक फैसलों में नियमों और कानूनी प्रक्रिया के पालन पर जोर बढ़ेगा।

22 मामलों में राज्यपाल की मंजूरी जरूरी-

नए नियमों में 22 ऐसी श्रेणियां तय की गई हैं, जिनसे जुड़े आदेश जारी करने से पहले मुख्यमंत्री को मामला राज्यपाल के पास भेजना होगा। इनमें केंद्र-राज्य संबंध, कानून-व्यवस्था, अध्यादेश और विधानसभा की कार्यवाही जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं। इसके अलावा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, ओबीसी और अल्पसंख्यकों से जुड़े कुछ मामले भी इसमें शामिल हैं।

1975 के नियमों की जगह नया ढांचा-

जनरल एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट ने इन नए नियमों को 14 अगस्त 2026 को अधिसूचित किया। इसके साथ ही करीब पांच दशक से राज्य प्रशासन को संचालित करने वाले पुराने नियमों की जगह नया प्रशासनिक ढांचा लागू हो गया है। सरकार के मुताबिक, ये नियम संविधान के अनुच्छेद 166(2) और 166(3) के तहत बनाए गए हैं, जो राज्य सरकार के कामकाज के संचालन से जुड़े प्रावधान निर्धारित करते हैं

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