Protocol in Rajya Sabha: राज्यसभा में बुधवार को पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति के दौरे के दौरान कथित प्रोटोकॉल उल्लंघन का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया गया।बाबूराम निषाद ने इस मामले को उठाते हुए कहा कि राष्ट्रपति पद किसी व्यक्ति का नहीं बल्कि 140 करोड़ भारतीयों के गौरव और संविधान की गरिमा का प्रतीक है।
राष्ट्रपति के स्वागत में नहीं पहुंचे राज्य के अधिकारी
मामला उस समय का है जब द्रौपदी मुर्मू के पश्चिम बंगाल दौरे के दौरान राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और कई वरिष्ठ अधिकारी उनके स्वागत और विदाई के समय मौजूद नहीं थे। इस घटना को लेकर संसद में सवाल उठाए गए।
Protocol in Rajya Sabha:‘यह केवल चूक नहीं, संवैधानिक अपराध’
राज्यसभा में बोलते हुए बाबूराम निषाद ने कहा कि यह विषय किसी दल या राजनीति से ऊपर है और सीधे तौर पर राष्ट्रपति की गरिमा तथा संविधान की आत्मा से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के प्रोटोकॉल का उल्लंघन केवल एक प्रशासनिक चूक नहीं बल्कि एक संवैधानिक अपराध है।
संविधान के अनुच्छेदों का दिया हवाला
भाजपा सांसद ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 52 से 62 तक राष्ट्रपदों की व्यवस्था और उनके महत्व का वर्णन किया गया है। उन्होंने कहा कि इन पदों का सम्मान करना सभी राज्य सरकारों और संस्थाओं का कर्तव्य है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार का यह आचरण अनुच्छेद 256 और 257 की भावना के भी खिलाफ है, जिनके तहत राज्यों को केंद्र के निर्देशों और संवैधानिक प्रोटोकॉल का पालन करना अनिवार्य होता है।
Protocol in Rajya Sabha: अनुच्छेद 356 के तहत कार्रवाई की मांग
निषाद ने कहा कि यदि कोई राज्य सरकार जानबूझकर राष्ट्रपति जैसे संवैधानिक पद के प्रोटोकॉल का उल्लंघन करती है तो इसे संवैधानिक तंत्र की विफलता माना जाना चाहिए और ऐसे मामलों में संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए।
केंद्र ने भी मांगा स्पष्टीकरण
गौरतलब है कि इस मामले को लेकर केंद्र सरकार पहले ही राज्य से जवाब मांग चुकी है। केंद्रीय गृह सचिव ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव से पूछा है कि राष्ट्रपति के दौरे के दौरान निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन क्यों नहीं किया गया।
बताया जा रहा है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने हाल ही में बागडोगरा एयरपोर्ट के पास आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री और राज्य के मंत्रियों की अनुपस्थिति का जिक्र किया था और कार्यक्रम स्थल बदलने के फैसले पर भी सवाल उठाए थे।
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