UP News: ग्रेटर नोएडा के बिसरख थाना क्षेत्र में पुलिस पर एक अधिवक्ता को अवैध रूप से हिरासत में लेने और मारपीट करने का गंभीर आरोप लगा है। इस मामले के सामने आने के बाद अधिवक्ताओं में भारी आक्रोश देखने को मिला। विरोध बढ़ने पर पुलिस अधिकारियों ने तत्काल कार्रवाई करते हुए चार पुलिसकर्मियों को निलंबित कर पूरे प्रकरण की विभागीय जांच शुरू कर दी गई है।
क्या है मामला?
जानकारी के अनुसार यह घटना शनिवार रात की बताई जा रही है। फेस-2 क्षेत्र निवासी अधिवक्ता फरीद अहमद, जो सूरजपुर जिला न्यायालय में प्रैक्टिस करते हैं, अपने घर पर परिवार के साथ मौजूद थे। इसी दौरान बिसरख कोतवाली की पुलिस एक मामले में वांछित उनके भाई की तलाश में उनके घर पहुंची। पुलिस ने घर पर पहुंचकर फरीद अहमद के भाई के बारे में पूछताछ की, लेकिन वह घर पर मौजूद नहीं था। आरोप है कि भाई के नहीं मिलने पर पुलिसकर्मी अधिवक्ता फरीद अहमद को ही जबरन अपने साथ थाने ले गए। परिवार के सदस्यों ने पुलिस की इस कार्रवाई का विरोध किया और अधिवक्ता को ले जाने से रोकने की कोशिश की, लेकिन पुलिसकर्मी उन्हें पकड़कर बिसरख कोतवाली ले गए।

पीड़ित अधिवक्ता फरीद अहमद का आरोप है कि उन्हें पूरी रात थाने में बंद रखकर मारपीट की गई। उनका कहना है कि पुलिसकर्मियों ने उनसे उनके भाई के बारे में जानकारी लेने के लिए दबाव बनाया और इसी दौरान उनके साथ मारपीट की गई। अधिवक्ता के अनुसार मारपीट के कारण उनके शरीर पर कई जगह चोट के निशान पड़ गए हैं। उन्होंने इस घटना को अवैध हिरासत और पुलिस की ज्यादती बताया है।
UP News: अधिवक्ताओं ने थाने पहुंचकर किया विरोध
घटना की जानकारी जैसे ही अन्य अधिवक्ताओं को मिली, सूरजपुर कोर्ट के वकीलों में आक्रोश फैल गया। रविवार को बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मनोज भाटी सहित कई अधिवक्ता बिसरख कोतवाली पहुंचे और पुलिस की कार्रवाई का विरोध किया। अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि बिना किसी कानूनी आधार के एक अधिवक्ता को हिरासत में लेना और उसके साथ मारपीट करना कानून के खिलाफ है। उन्होंने दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। अधिवक्ताओं के विरोध के बाद पुलिस अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई की। बिसरख कोतवाली में तैनात दो उपनिरीक्षक श्रीपाल गिरी और कृष्ण कुमार सहित दो अन्य पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रथम दृष्टया मामले को गंभीर मानते हुए यह कार्रवाई की गई है।
वहीं इस मामले में सेंट्रल जोन के एडिशनल डीसीपी आरके गौतम ने बताया कि अधिवक्ता के भाई के खिलाफ मारपीट से संबंधित एक मुकदमा दर्ज है। उसी मामले में पुलिस उसकी तलाश में उसके घर गई थी। अधिवक्ता द्वारा दिए गए शिकायत पत्र के आधार पर पूरे मामले की विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।
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