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आयुर्वेद के अनुसार फल खाने के सही समय और तरीके: जानें 7 अहम नियम

आयुर्वेद में फल खाने के नियम शरीर की प्रकृति के अनुसार बताए गए हैं। सही समय और तरीके से फल खाने से पाचन बेहतर होता है, ऊर्जा मिलती है और स्वास्थ्य मजबूत रहता है।
फल खाने का सही समय और नियम

Fruit Eating Habits: आयुर्वेद में जीवन जीने और स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए आहार और जीवनशैली से जुड़े कई नियम बताए गए हैं। यह शरीर की प्रकृति (वात, पित्त, कफ) के अनुसार खाने-पीने और जीवनशैली का चयन करने पर जोर देता है।

फल और अन्य आहार भी प्रत्येक व्यक्ति की प्रकृति के अनुसार खाने की सलाह दी जाती है। अक्सर लोग जब मन करता है, तब फल खा लेते हैं। कुछ लोग फल को छीलकर खाते हैं, जबकि कुछ लोग जूस बनाकर पीना पसंद करते हैं। लेकिन क्या ये तरीके शरीर को पूरा पोषण पहुंचाते हैं?

Fruit Eating Habits: फल खाने का सही समय और नियम
Fruit Eating Habits

फल खाने का सही समय चुनें

आयुर्वेद के अनुसार, फल स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद हैं, लेकिन इन्हें सही समय और सही तरीके से खाना भी जरूरी है। हमेशा मौसमी और पके हुए फल चुनें, क्योंकि कच्चे फल पित्त बढ़ा सकते हैं। फल खाने का सबसे अच्छा समय सुबह या शाम के बीच माना जाता है, और एक समय में केवल एक प्रकार का फल खाना फायदेमंद होता है। इससे पाचन सुधरता है, ऊर्जा मिलती है और शरीर स्वस्थ रहता है।

फल खाने का सही समय और नियम
फल खाने का सही समय और नियम

Fruit Eating Habits: पके और कच्चे फल खाने नियम

आने वाले महीनों में आम बाजार में आसानी से मिलेगा। पके आम को दोपहर या शाम को खाना सबसे अच्छा है, क्योंकि यह शरीर को ऊर्जा देता है। वहीं, कच्चे आम से पित्त बढ़ सकता है, इसलिए इसे चटनी या सब्जी में मिलाकर खाया जा सकता है।

केला सालभर आसानी से मिलता है और घर में इसका सेवन आम है। लेकिन केले से कफ बढ़ता है, इसलिए कफ प्रवृत्ति वाले लोग इसे सीमित मात्रा में ही खाएं।

वात दोष वाले लोगों के लिए खजूर और खट्टे फल जैसे अंगूर लाभकारी हैं। फलों का सेवन खाली पेट नहीं, बल्कि नाश्ते के बाद करना चाहिए। शाम को सूरज ढलने से पहले तक ही फलों का सेवन करें।

फल खाने का सही समय और नियम
फल खाने का सही समय और नियम

फल और जूस सेवन में सावधानी

कुछ लोग फलों की बजाय शेक या जूस पीना पसंद करते हैं। लेकिन फल और दूध एक साथ लेना आयुर्वेद के अनुसार विरुद्ध आहार है और इससे पोषण नहीं मिलता, बल्कि स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। जूस पीने से फलों का फाइबर बाहर निकल जाता है और केवल रस बचता है, जो ताजगी देता है, लेकिन पूरा पोषण नहीं देता। इसके अलावा, जूस से शरीर में शुगर की मात्रा बढ़ सकती है।

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