RSS News: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर में कहा कि दुनिया में स्थायी शांति तभी संभव है जब लोग स्वार्थ त्यागकर एकजुट होकर अच्छे मूल्यों पर चलें। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान वैश्विक संघर्षों को रोकने की क्षमता भारत में है, क्योंकि यहां सभी को साथ लेकर चलने की परंपरा रही है। भागवत नागपुर में विश्व हिंदू परिषद (VHP) के कार्यालय की आधारशिला रखने के बाद आयोजित सभा को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि आज दुनिया में चल रहे युद्धों और संघर्षों की मूल वजह स्वार्थ और वर्चस्व की भावना है।
भारत दिखा सकता है विश्व को रास्ता
मोहन भागवत ने कहा कि विश्व में लंबे समय से संघर्षों के समाधान के लिए विभिन्न विचारों पर प्रयोग होते रहे हैं, लेकिन अपेक्षित सफलता नहीं मिली। उन्होंने कहा कि धार्मिक असहिष्णुता, जबरन धर्म परिवर्तन और श्रेष्ठता-हीनता की सोच आज भी वैश्विक तनाव का कारण बनी हुई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत की “सब एक हैं की प्राचीन परंपरा ही दुनिया को सौहार्द और सहयोग का मार्ग दिखा सकती है। उनके अनुसार, संघर्ष में कोई अर्थ नहीं, समन्वय में ही सच्चा अर्थ है। भागवत ने कहा कि दुनिया आज विनाश की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है, ऐसे में शांति का मार्ग एकता, अनुशासन और धर्म के पालन से ही निकलेगा। उन्होंने कहा कि भारत में सभी को एकजुट करने की शक्ति है, लेकिन इसके लिए समाज में धर्म का आचरण जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत का संविधान उसकी सांस्कृतिक परंपरा को दर्शाता है और इसमें मौजूद प्रतीक हमारी विरासत को प्रतिबिंबित करते हैं।
RSS News: धर्म केवल किताबों तक सीमित नहीं
RSS प्रमुख ने स्पष्ट किया कि धर्म केवल किताबों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि यह लोगों के व्यवहार और आचरण में भी दिखना चाहिए। उन्होंने कहा कि नैतिक मूल्यों और अनुशासन के पालन के लिए निरंतर अभ्यास जरूरी है, भले ही इसमें व्यक्तिगत कठिनाइयों का सामना करना पड़े। मोहन भागवत ने कहा कि भारत मानवता के दृष्टिकोण में विश्वास करता है, जबकि कई अन्य देश शक्ति और वर्चस्व को प्राथमिकता देते हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया को संघर्ष नहीं, बल्कि सौहार्द और सहयोग की दिशा में आगे बढ़ने की जरूरत है।
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