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13 साल बाद मिली मुक्ति: इच्छामृत्यु के बाद श्मशान पहुंचा हरीश राणा का पार्थिव शरीर, पिता बोले,”कोई मत रोना, बेटा शांति से जाए”

13 साल से कोमा में रहे हरीश राणा ने दिल्ली के अस्पताल में अंतिम सांस ली। सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के बाद उन्हें इच्छामृत्यु दी गई थी। इसके बाद दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट में उनका अंतिम संस्कार किया गया, जहां भाई ने मुखाग्नि दी।
इच्छामृत्यु के बाद हरीश राणा का अंतिम संस्कार

Harish Rana Death Case: गाजियाबाद के हरीश राणा, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के बाद इच्छामृत्यु दी गई थी, उनका अंतिम संस्कार बुधवार को कर दिया गया। दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट में सुबह करीब 9:40 बजे उनके छोटे भाई आशीष राणा ने मुखाग्नि दी। अंतिम संस्कार के दौरान परिवार और वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं।

पिता ने बेटे को किया आखिरी प्रणाम

अंतिम संस्कार से पहले हरीश का पार्थिव शरीर श्मशान घाट लाया गया। यहां उनके पिता अशोक राणा (62) ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया। वह हाथ जोड़कर लोगों के सामने खड़े हो गए और भावुक होकर बोले कि कोई रोए नहीं। उन्होंने कहा कि वह भगवान से यही प्रार्थना कर रहे हैं कि उनका बेटा शांति से जाए और अगला जन्म जहां भी मिले, उसे भगवान का आशीर्वाद प्राप्त हो।

इच्छामृत्यु के बाद हरीश राणा का अंतिम संस्कार
इच्छामृत्यु के बाद हरीश राणा का अंतिम संस्कार

Harish Rana Death Case: 13 साल से कोमा में थे हरीश

31 साल के हरीश राणा ने 24 मार्च की शाम करीब 4:10 बजे दिल्ली के एम्स अस्पताल में अंतिम सांस ली थी। वह पिछले 13 वर्षों से कोमा में थे।11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी। इसे देश का पहला ऐसा मामला माना जा रहा है, जिसमें किसी मरीज को इस तरह की अनुमति मिली।

परिवार ने हार्ट वाल्व और कॉर्निया किए दान

हरीश के परिवार ने मानवता का उदाहरण पेश करते हुए उनके हार्ट के वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। एम्स अस्पताल में उन्हें पैसिव यूथेनेशिया दी गई थी।पैसिव यूथेनेशिया का मतलब होता है कि किसी गंभीर रूप से बीमार मरीज को जिंदा रखने के लिए जो लाइफ सपोर्ट या इलाज दिया जा रहा होता है, उसे बंद या हटा दिया जाता है, ताकि मरीज की प्राकृतिक रूप से मृत्यु हो सके।

Harish Rana Death Case: अंतिम संस्कार में पहुंचे अजय राय

अंतिम संस्कार के दौरान उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अजय राय भी श्मशान घाट पहुंचे। उन्होंने हरीश को श्रद्धांजलि दी और उनके पिता को ढांढस बंधाया।अजय राय ने कहा कि परिवार ने 13 साल तक अपने बेटे की सेवा की है। यह परिवार पूरे देश के लिए एक मिसाल बन गया है और कांग्रेस पार्टी इस परिवार के साथ खड़ी है।

इच्छामृत्यु के बाद हरीश राणा का अंतिम संस्कार
इच्छामृत्यु के बाद हरीश राणा का अंतिम संस्कार

मां की हालत देखकर भावुक हुआ माहौल

श्मशान घाट पर हरीश की मां निर्मला राणा बेहद दुखी दिखाई दीं। वह लगातार रो रही थीं और नंगे पैर खड़ी थीं। उनके साथ कई महिलाएं मौजूद थीं, जो उन्हें संभालने की कोशिश कर रही थीं।इस दौरान हरीश के पार्थिव शरीर को चिता पर रखा गया और गायत्री मंत्र के उच्चारण के साथ अंतिम क्रियाएं शुरू हुईं। वहां मौजूद लोगों ने हाथ जोड़कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।

मोक्ष स्थल पर फूलों से सजाई गई चिता

जिस स्थान पर हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, वहां पहले से गुलाब के फूल बिछाए गए थे। चिता पर उपले रखे जा चुके थे। पंडित और परिवार के सदस्य मिलकर अंतिम संस्कार की सभी रस्में पूरी कर रहे थे।

Harish Rana Death Case: 14 मार्च को एम्स में किया गया था शिफ्ट

हरीश राणा को 14 मार्च को दिल्ली के एम्स अस्पताल में शिफ्ट किया गया था। इसके बाद 16 मार्च को अस्पताल प्रशासन ने उनकी फीडिंग ट्यूब, यानी खाने की नली, हटा दी थी।एम्स में उनकी मां निर्मला राणा और पिता अशोक राणा को वार्ड के पास ही एक कमरा दिया गया था। मां अधिकतर समय बेटे के पास रहती थीं, जबकि पिता, भाई और बहन समय-समय पर उनसे मिलने आते थे।

Harish Rana Death Case: इच्छामृत्यु के बाद हरीश राणा का अंतिम संस्कार
इच्छामृत्यु के बाद हरीश राणा का अंतिम संस्कार

2013 में हादसे के बाद बदली जिंदगी

हरीश राणा चंडीगढ़ की पंजाब यूनिवर्सिटी से बीटेक की पढ़ाई कर रहे थे। साल 2013 में वह अपने हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिर गए थे। इस हादसे के बाद उनकी हालत गंभीर हो गई।इस दुर्घटना के कारण उनके पूरे शरीर में लकवा मार गया और वह कोमा में चले गए। वह न बोल पाते थे और न ही किसी तरह की प्रतिक्रिया दे पाते थे।

Harish Rana Death Case: क्वाड्रिप्लेजिया से पीड़ित थे हरीश

डॉक्टरों ने बताया था कि हरीश क्वाड्रिप्लेजिया नाम की गंभीर बीमारी से पीड़ित थे। इस स्थिति में मरीज के शरीर के चारों अंग प्रभावित हो जाते हैं और वह पूरी तरह से फीडिंग ट्यूब और वेंटिलेटर जैसे लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर हो जाता है। ऐसे मरीज के ठीक होने की संभावना बहुत कम होती है।करीब 13 साल तक लगातार बिस्तर पर रहने की वजह से उनके शरीर पर गहरे घाव, यानी बेडसोर्स बन गए थे। समय के साथ उनकी सेहत लगातार बिगड़ती चली गई।

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