Nitish Kumar: बिहार की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता Tejashwi Yadav ने मुख्यमंत्री Nitish Kumar के एमएलसी पद से इस्तीफे को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। तेजस्वी यादव का कहना है कि यह इस्तीफा नीतीश कुमार का निजी फैसला नहीं बल्कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दबाव में लिया गया कदम है। इस मुद्दे पर सियासी घमासान और तेज हो गया है।
भाजपा के दबाव में लिया गया फैसला: तेजस्वी
तेजस्वी यादव ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि नीतीश कुमार को एमएलसी पद से इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि जदयू के अंदर भाजपा के “एजेंट” सक्रिय हैं, जो ऐसे फैसले थोप रहे हैं। तेजस्वी ने यह भी कहा कि उन्होंने पहले ही चेतावनी दी थी कि भाजपा नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद पर लंबे समय तक नहीं रहने देगी।
Nitish Kumar: सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप
राजद नेता ने राज्य सरकार पर जनता को गुमराह करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बिहार में बिजली पहले से महंगी थी और अब और महंगी हो गई है। साथ ही, महिलाओं को 2 लाख रुपए देने के वादे को भी सरकार पूरा नहीं कर पाई। तेजस्वी के अनुसार, केवल 10,000 रुपए देकर बाकी रकम चुनाव के बाद देने का वादा भी अब अधूरा छोड़ दिया गया है।
संवैधानिक प्रक्रिया के तहत इस्तीफा
वहीं, नीतीश कुमार ने राज्यसभा सदस्य के रूप में कार्यभार संभालने से पहले संवैधानिक प्रावधानों के तहत विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दिया। वे 16 मार्च को राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए थे और 10 अप्रैल को शपथ लेंगे। संविधान के अनुसार, संसद के लिए चुने गए प्रतिनिधि को 14 दिनों के भीतर अपने पुराने पद से इस्तीफा देना होता है। इसी नियम का पालन करते हुए उन्होंने 30 मार्च को अपना इस्तीफा सौंपा, जिससे उनका विधान परिषद से लंबा जुड़ाव समाप्त हो गया।







