US-Iran War: पश्चिम एशिया में जारी अमेरिका-ईरान युद्ध अब पांचवें सप्ताह में पहुंच चुका है। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने रुख में बड़ा बदलाव किया है। अब वे होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोले बिना भी युद्ध खत्म करने के पक्ष में नजर आ रहे हैं।
होर्मुज को लेकर बदली रणनीति
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप ने अपने सहयोगियों से कहा है कि अगर होर्मुज स्ट्रेट को जबरन खुलवाने के लिए सैन्य अभियान चलाया गया, तो युद्ध और लंबा खिंच सकता है। ऐसे में प्राथमिकता युद्ध को जल्दी खत्म करने की है, जबकि होर्मुज को खोलने का मुद्दा बाद में अलग से देखा जा सकता है।
US-Iran War: नेवी और मिसाइल सिस्टम निशाने पर
अमेरिकी रणनीति में अब बदलाव दिख रहा है। अधिकारियों के अनुसार, अमेरिका का ध्यान ईरान की नौसेना और मिसाइल भंडार को कमजोर करने पर केंद्रित किया जा रहा है। साथ ही, व्यापारिक गतिविधियों को बहाल करने के लिए ईरान पर कूटनीतिक दबाव भी बढ़ाया जाएगा।
सहयोगियों पर दबाव की तैयारी
अगर ईरान पर दबाव डालने की रणनीति सफल नहीं होती, तो अमेरिका यूरोप और खाड़ी देशों के सहयोगियों पर होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने के लिए दबाव बना सकता है। यह वैश्विक तेल सप्लाई के लिए बेहद अहम मार्ग माना जाता है।
US-Iran War: पहले दिए थे सख्त बयान
गौरतलब है कि युद्ध की शुरुआत से ही डोनाल्ड ट्रंप होर्मुज को लेकर कई बार सख्त बयान दे चुके हैं। उन्होंने पहले चेतावनी दी थी कि अगर ईरान ने इस जलमार्ग को नहीं खोला, तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
अब भी बरकरार है सैन्य विकल्प
हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ट्रंप के पास सैन्य विकल्प अब भी मौजूद हैं, लेकिन फिलहाल यह उनकी प्राथमिकता में नहीं है।
US-Iran War: ईरान को दी थी कड़ी धमकी
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में ईरान को चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर जल्द कोई समझौता नहीं हुआ, तो तेहरान के तेल कुओं, बिजली संयंत्रों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया जा सकता है। यहां तक कि उन्होंने ईरान के डीसैलिनेशन प्लांट्स को भी टारगेट करने की बात कही थी।
वैश्विक बाजार पर असर
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में इस मार्ग को लेकर अमेरिका की बदली रणनीति का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार और ऊर्जा कीमतों पर भी पड़ सकता है।
US-Iran War: कूटनीति और युद्ध के बीच संतुलन
फिलहाल, अमेरिका एक तरफ कूटनीतिक बातचीत जारी रखने की बात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर सैन्य दबाव बनाए हुए है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या यह बदली रणनीति युद्ध के अंत की दिशा तय कर पाती है या नहीं।
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