UP News: भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी बेबाक आवाज़ और संघर्ष के लिए जाने जाने वाले यूपी कैडर के वरिष्ठ IAS अधिकारी रिंकू सिंह राही ने सरकारी सेवा से इस्तीफा दे दिया है। अपने त्यागपत्र में राही ने उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्थाओं और वहां सक्रिय “समांतर सिस्टम” पर गंभीर सवाल उठाए हैं। राही ने साफ तौर पर कहा कि एक ईमानदार अधिकारी के लिए गरिमापूर्ण और सार्थक कार्य आवंटन न होना ही उन्हें यह नैतिक निर्णय लेने पर मजबूर कर गया। उनके इस्तीफे ने प्रदेश प्रशासन में पारदर्शिता और अधिकारियों की स्थिति पर नई बहस को जन्म दे दिया है।
क्यों दिया इस्तीफा?
यूपी के भ्रष्टाचार विरोधी IAS अधिकारी रिंकू सिंह राही ने अपने इस्तीफे के पीछे की वजह साझा करते हुए कहा कि एसडीएम रहते हुए की गई कार्रवाई के बाद उन्हें प्रशासनिक तौर पर साइडलाइन कर दिया गया। राही ने स्पष्ट किया कि उन्हें तनख्वाह तो मिल रही थी, लेकिन जनता की सेवा करने का मौका नहीं दिया जा रहा था। उन्होंने अपने इस्तीफे को नैतिक और सैद्धांतिक निर्णय बताया और कहा कि एक ईमानदार अधिकारी के लिए सिर्फ वेतन लेना और जिम्मेदारियां निभाने का मौका न मिलना असहनीय था।
UP News: मुजफ्फरनगर से IAS रिंकू सिंह राही का संघर्ष
यूपी के ईमानदार और भ्रष्टाचार विरोधी IAS अधिकारी रिंकू सिंह राही का मुजफ्फरनगर से गहरा और दर्दनाक नाता रहा है। वर्ष 2009 में समाज कल्याण विभाग में तैनात रहते हुए राही ने 80 करोड़ रुपये के छात्रवृत्ति घोटाले का भंडाफोड़ किया था। इस खुलासे से बौखलाए माफियाओं ने उन पर हमला कर दिया। राही को 7 गोलियां लगीं, जिससे उनका चेहरा बुरी तरह घायल हुआ और एक आंख की रोशनी चली गई। बावजूद इसके, उन्होंने हार नहीं मानी और पढ़ाई जारी रखते हुए IAS बनकर एक मिसाल कायम की।
यहीं नहीं हाल के दिनों में शाहजहांपुर में एसडीएम रहते हुए, वकीलों के प्रदर्शन के दौरान उनका एक वीडियो वायरल हुआ। इसके बाद सरकार ने उन्हें मुख्यालय से जोड़ दिया और तब से उन्हें कोई नई जिम्मेदारी नहीं मिली। राही ने बताया कि इससे उनका मनोबल टूट रहा था और उन्हें जनसेवा का मौका नहीं मिल रहा था, केवल वेतन ही दिया जा रहा था।
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