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‘सडन इन्फेंट डेथ सिंड्रोम’ क्या है? शिशु में अचानक मृत्यु के कारण और इससे जुड़े जोखिम को कैसे कम करें

SIDS Prevention Tips: हर माता-पिता अपने शिशु की सुरक्षा को लेकर बहुत चिंतित रहते हैं, खासकर जब वे पहली बार माता-पिता बनते हैं। इसी चिंता से जुड़ी एक गंभीर स्थिति ‘सडन इन्फेंट डेथ सिंड्रोम’ (SIDS) है, जिसमें एक स्वस्थ दिखने वाला शिशु बिना किसी स्पष्ट कारण के अचानक मृत्यु का शिकार हो सकता है। यूनाइटेड नेशंस इंटरनेशनल चिल्ड्रेंस इमरजेंसी फंड (UNICEF) के अनुसार यह स्थिति दुर्लभ है, लेकिन इसके बारे में जागरूक रहना जरूरी है ताकि जोखिम को कम किया जा सके।

‘सडन इन्फेंट डेथ सिंड्रोम’ क्या होता है?

SIDS एक ऐसी स्थिति है जिसमें पूरी तरह से स्वस्थ दिखने वाला शिशु अचानक और अप्रत्याशित रूप से अपनी जान गंवा देता है। सबसे बड़ी बात यह है कि मेडिकल जांच के बाद भी इसका कोई स्पष्ट कारण सामने नहीं आता। यह अधिकतर नींद के दौरान होता है और विशेषज्ञों के अनुसार यह किसी एक वजह से नहीं बल्कि कई जोखिम कारकों के एक साथ आने से होता है।

SIDS के मुख्य जोखिम कारक

आपको बता दें,  SIDS के पीछे तीन मुख्य प्रकार के जोखिम कारक माने जाते हैं। पहला है शारीरिक कमजोरी, जिसमें समय से पहले जन्मे बच्चे या गर्भावस्था के दौरान तंबाकू के धुएं के संपर्क में आए शिशु अधिक जोखिम में होते हैं। दूसरा है सामाजिक कारण, जिसमें स्वास्थ्य सेवाओं की कमी, माता-पिता को सही सहायता न मिलना और असुरक्षित जीवन परिस्थितियां शामिल हैं। तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण कारण असुरक्षित नींद का वातावरण है, जिसमें गलत तरीके से सुलाना, नरम बिस्तर, तकिए, ढीले कंबल, खिलौने या धूम्रपान वाला वातावरण शामिल होता है।

किन बच्चों में SIDS का खतरा ज्यादा होता है?

UNICEF के अनुसार SIDS से जुड़ी अधिकतर घटनाएं 6 महीने से कम उम्र के शिशुओं में देखी जाती हैं। हालांकि जोखिम को पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता, इसलिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि कम से कम 1 साल तक शिशु की नींद और देखभाल में विशेष सावधानी बरती जाए।

SIDS Prevention Tips: सुरक्षित नींद का ABC नियम

शिशु को सुरक्षित सुलाने के लिए ABC नियम बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इसमें ‘A’ का मतलब है Alone यानी शिशु को हमेशा अपने अलग बिस्तर पर सुलाना और माता-पिता के साथ सोफे या कुर्सी पर न सुलाना। ‘B’ का मतलब है Back यानी शिशु को हमेशा पीठ के बल सुलाना। ‘C’ का मतलब है Crib यानी शिशु का बिस्तर सख्त, साफ और सपाट होना चाहिए, जिसमें कोई तकिया, ढीली चादर, कंबल या खिलौने न हों।

शिशु को पास रखें लेकिन अलग सुलाएं

पहले छह महीनों तक शिशु को माता-पिता के बेड के पास रखना सुरक्षित माना जाता है, लेकिन उसे अलग क्रिब या बास्केट में सुलाना चाहिए। इससे न केवल SIDS का खतरा कम होता है बल्कि रात में स्तनपान कराना भी आसान हो जाता है।

SIDS Prevention Tips

धूम्रपान से दूरी बेहद जरूरी

गर्भावस्था के दौरान और बच्चे के जन्म के बाद घर में किसी भी प्रकार का धूम्रपान पूरी तरह बंद होना चाहिए। तंबाकू का धुआं SIDS के सबसे बड़े जोखिम कारकों में से एक माना जाता है, इसलिए शिशु को ऐसे वातावरण से दूर रखना जरूरी है।

सही तापमान और देखभाल

शिशु को न बहुत ज्यादा गर्म और न बहुत ज्यादा ठंडा रखना चाहिए। कमरे का तापमान सामान्य और आरामदायक होना चाहिए तथा मौसम के अनुसार हल्के कपड़े पहनाने चाहिए। इससे शिशु सुरक्षित और आरामदायक नींद ले पाता है।

अन्य जरूरी सावधानियां

शिशु के सोने की जगह हमेशा साफ-सुथरी होनी चाहिए। स्तनपान को बढ़ावा देना भी SIDS के जोखिम को कम करने में मदद करता है। इसके साथ ही नियमित रूप से डॉक्टर से शिशु का चेकअप करवाना भी बेहद जरूरी है ताकि उसकी सेहत पर नजर रखी जा सके।

SIDS एक दुर्लभ लेकिन गंभीर स्थिति है, लेकिन अच्छी बात यह है कि सही जानकारी और सुरक्षित नींद की आदतों को अपनाकर इसके खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। माता-पिता की सतर्कता न केवल SIDS से बचाव में मदद करती है बल्कि शिशु को कई अन्य स्वास्थ्य जोखिमों से भी सुरक्षित रखती है।

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