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पटना का गुल्लक बच्चा बैंक, जहां मैनेजर से ग्राहक तक सभी बच्चे; 659 खातों में करीब 9 लाख रुपये जमा

Children Bank Patna: पटना में एक अलग तरह का बैंक चल रहा है। इस बैंक की खास बात यह है कि यहां मैनेजर से लेकर ग्राहक तक सभी बच्चे हैं। इस बैंक का नाम गुल्लक बच्चा बैंक है। यह बिहार किलकारी बाल भवन में चलता है। बच्चों को पैसे बचाने की आदत सिखाने के लिए इस बैंक की शुरुआत की गई थी। अभी इस बैंक में 659 बच्चों के खाते हैं।इनमें करीब नौ लाख रुपये जमा हैं। किलकारी में प्रशिक्षण ले रहे यश राज के खाते में सबसे अधिक 28,030 रुपये जमा हैं।

पटना में बच्चों का बैंक, किलकारी के बच्चे ही ग्राहक

गुल्लक बच्चा बैंक को चलाने के लिए एक समिति बनाई गई है। यह समिति बैंक के पूरे कामकाज पर नजर रखती है। किलकारी में प्रशिक्षण लेने वाले बच्चे ही इस बैंक में खाता खुलवा सकते हैं। यहां 8 साल से 16 साल तक के बच्चों का खाता खोला जाता है। खाता खोलने की प्रक्रिया भी आम बैंकों जैसी ही है। समय-समय पर बच्चों को केवाईसी भी कराना पड़ता है। इस बैंक में बच्चे 1 रुपये से लेकर 50 रुपये जमा करके अपना खाता खोल सकते हैं।

बैंक में 4205 बच्चों ने खुलवाए खाते

गुल्लक बच्चा बैंक की मैनेजर 19 साल की प्रियंका कुमारी हैं। आदिति कुमारी डिप्टी मैनेजर हैं। दोनों ने किलकारी से ट्रेनिंग ली है। अब तक इस बैंक में 4205 बच्चों के खाते खोले गए हैं। इनमें से 3546 खाते बंद हो चुके हैं। अभी 659 खाते चालू हैं। किलकारी के लेखा पदाधिकारी विनय मिश्रा ने बताया कि बच्चे हर दिन पांच रुपये तक खुद जमा और निकाल सकते हैं। इससे ज्यादा पैसे निकालने के लिए माता-पिता की अनुमति जरूरी होती है। ज्यादातर बच्चे कॉपी और किताब खरीदने के लिए पैसे निकालते हैं। हर महीने खाते में पैसे जमा या निकासी करना जरूरी है। ऐसा नहीं करने पर खाता बंद हो जाता है। बाद में केवाईसी कराने के बाद खाता फिर से चालू किया जा सकता है। जो बच्चे नियमित रूप से लेन-देन करते हैं, उन्हें हर छह महीने पर दो प्रतिशत ब्याज भी मिलता है। 16 साल की उम्र होने पर बच्चों का खाता बंद कर दिया जाता है। अगर बच्चे चाहें तो उनका खाता Indian Overseas Bank में ट्रांसफर भी किया जाता है।

Children Bank Patna

Children Bank Patna: बैंकिंग की पढ़ाई भी, बचत की सीख भी

बैंक में काम करने वाले बच्चों को समय-समय पर ट्रेनिंग दी जाती है। हर दो साल में बैंक के बच्चों कर्मचारियों को बदल दिया जाता है, ताकि दूसरे बच्चों को भी काम करने का मौका मिल सके। बैंक चलाने वाले बच्चों को जेब खर्च के तौर पर हर महीने पांच हजार से 11 हजार रुपये तक की मदद राशि भी दी जाती है।

गुल्लक बच्चा बैंक का नाम लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज

गुल्लक बच्चा बैंक आम बैंकों की तरह ही काम करता है। यहां बच्चों को लगभग सभी बैंकिंग सुविधाएं मिलती हैं। किलकारी के मुताबिक, इस बैंक को शुरू करने का मकसद बच्चों में पैसे बचाने की आदत डालना है। इस बैंक की शुरुआत साल 2009 में हुई थी। इसकी खास उपलब्धि को देखते हुए साल 2017 में इसका नाम लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज किया गया था।

Written by- Rishika Srivastva

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