US-Iran War: डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ चल रहे सैन्य संघर्ष को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना अगले दो से तीन हफ्तों में इस संघर्ष से बाहर आ सकती है, क्योंकि अमेरिका अपना मुख्य उद्देश्य हासिल कर चुका है।
‘परमाणु कार्यक्रम रोकना था लक्ष्य’
व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत करते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिका का मकसद ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकना था, जो अब पूरा हो चुका है। उन्होंने दावा किया कि लगातार सैन्य कार्रवाई से ईरान की ताकत काफी कमजोर हो गई है और अब उसके पास परमाणु हथियार विकसित करने की क्षमता नहीं बची है।
US-Iran War: ईरान में ‘बदलाव’ का संकेत
ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान की मौजूदा स्थिति पहले जैसी नहीं रही और वहां नेतृत्व में बदलाव हुआ है। उन्होंने कहा कि अब अमेरिका “ज्यादा समझदार लोगों” से बातचीत कर रहा है, जिससे समझौते की संभावना बढ़ी है।
समझौते के संकेत, लेकिन शर्त नहीं
अमेरिकी राष्ट्रपति ने बातचीत के जरिए समझौते की संभावना जताई, लेकिन साफ किया कि सेना की वापसी किसी समझौते पर निर्भर नहीं होगी। उन्होंने कहा कि जब अमेरिका को लगेगा कि ईरान को लंबे समय के लिए कमजोर कर दिया गया है, तब सैनिकों को वापस बुला लिया जाएगा।
US-Iran War: ‘ईरान को 15-20 साल पीछे धकेला’
ट्रंप के मुताबिक, इस सैन्य कार्रवाई ने ईरान को 15 से 20 साल पीछे धकेल दिया है। उन्होंने इसे अमेरिका की बड़ी रणनीतिक सफलता बताते हुए कहा कि यह कदम इसलिए जरूरी था ताकि ईरान परमाणु हथियार विकसित न कर सके।
सैन्य क्षमताओं को नुकसान का दावा
ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी हमलों में ईरान की नौसेना, वायुसेना और कई अहम सैन्य ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचा है। उन्होंने कहा कि ईरान की संचार व्यवस्था और एयर डिफेंस सिस्टम भी काफी हद तक नष्ट हो चुके हैं, जिससे अब अमेरिकी विमान क्षेत्र में आसानी से ऑपरेट कर पा रहे हैं।
US-Iran War: ‘ईरान हार मान रहा है’
ट्रंप ने कहा कि ईरान खुद स्वीकार कर रहा है कि वह इस संघर्ष में कमजोर पड़ गया है और अब समझौते के लिए तैयार है। उन्होंने इसे “निर्णायक जीत” बताते हुए कहा कि अमेरिका ने अपने सभी प्रमुख लक्ष्य हासिल कर लिए हैं।
आगे की रणनीति पर नजर
अमेरिकी राष्ट्रपति के इस बयान के बाद अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या आने वाले हफ्तों में यह संघर्ष समाप्त हो सकता है। फिलहाल अमेरिका की रणनीति और ईरान की प्रतिक्रिया पर दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।
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