Iran crisis: बीजिंग से सामने आए ताजा बयान में साफ दिख रहा है कि होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बढ़ते तनाव ने अब वैश्विक चिंता का रूप ले लिया है। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी टकराव के चलते इस अहम समुद्री रास्ते पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है, जिससे कई देशों के सामने ऊर्जा संकट खड़ा हो गया है। इस बीच अमेरिका ने खुद को इस स्थिति से अलग बताया है, जबकि चीन अब सक्रिय भूमिका निभाता नजर आ रहा है।
चीन ने शांति की अपील की
चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में जल्द से जल्द युद्धविराम और स्थिरता बहाल होना पूरी दुनिया की जरूरत है। उन्होंने सभी पक्षों से अपील की कि वे तनाव कम करने की दिशा में ठोस कदम उठाएं। माओ ने यह भी कहा कि चीन लगातार सभी देशों के संपर्क में है और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश कर रहा है।
Iran crisis: अमेरिका-इजरायल पर साधा निशाना
माओ निंग ने इस संकट के लिए अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई को जिम्मेदार ठहराया। उनका कहना है कि इस तरह के कदमों से हालात और बिगड़ते हैं और समुद्री सुरक्षा पर असर पड़ता है। उन्होंने साफ कहा कि दुश्मनी खत्म किए बिना इस समस्या का हल संभव नहीं है।
Iran crisis: ‘संघर्ष किसी के हित में नहीं’
चीन ने दोहराया कि सैन्य कार्रवाई से इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकलेगा। माओ निंग के मुताबिक, अगर तनाव बढ़ता है तो इसका नुकसान सभी देशों को होगा, इसलिए बातचीत ही एकमात्र रास्ता है।
ट्रंप ने झाड़ा पल्ला
इस पूरे मामले में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा की जिम्मेदारी अमेरिका की नहीं है। उन्होंने साफ किया कि अमेरिका का इस मुद्दे से कोई सीधा संबंध नहीं है।
चीन-पाकिस्तान का 5 सूत्रीय प्लान
Iran crisis: चीन और पाकिस्तान ने मिलकर एक 5 सूत्रीय प्रस्ताव तैयार किया है, जिसमें जल्द शांति वार्ता शुरू करने और होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने की बात कही गई है। इससे साफ है कि अब इस संकट को सुलझाने के लिए नए कूटनीतिक प्रयास तेज हो रहे हैं।
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