Jaisalmer Lake: राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों में पानी की समस्या दूर करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। जैसलमेर जिले में 28 किलोमीटर लंबी विशाल कृत्रिम झील तैयार की गई है, जिससे जैसलमेर और बाड़मेर जिलों के लाखों लोगों को सालभर पानी उपलब्ध कराया जा सकेगा। जलदाय विभाग के अनुसार, यह परियोजना सीमावर्ती क्षेत्रों में पानी संकट खत्म करने के उद्देश्य से शुरू की गई थी और अब इसका काम लगभग पूरा हो चुका है। इस झील के जरिए करीब 50 लाख लोगों को लगातार पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने का दावा किया गया है।
रेगिस्तान में तैयार हुई विशाल जल भंडारण परियोजना
जलदाय विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, यह झील करीब 28 किलोमीटर लंबी और 33 फीट गहरी है। इसे रेगिस्तानी क्षेत्र की सबसे बड़ी जल भंडारण परियोजनाओं में शामिल माना जा रहा है। जैसलमेर और बाड़मेर जैसे इलाकों में हर साल इंदिरा गांधी नहर की मरम्मत और रखरखाव के दौरान नहरबंदी होती थी, जिससे पेयजल संकट गहरा जाता था। इसी समस्या के समाधान के लिए वर्ष 2024 में इस महत्वाकांक्षी परियोजना की शुरुआत की गई थी।
Jaisalmer Lake: पानी बचाने के लिए बिछाई गई विशेष परत
रेतीली जमीन में पानी रिसने की बड़ी चुनौती को देखते हुए झील के तल में 300 माइक्रोन की विशेष प्लास्टिक शीट बिछाई गई है। यह मजबूत परत पानी को जमीन में समाने से रोकेगी। विभाग के अनुसार, इंदिरा गांधी नहर से आने वाले अतिरिक्त और बारिश के पानी को इस झील में संग्रहित किया जाएगा। बाद में फिल्टर संयंत्रों के जरिए यही पानी जैसलमेर और बाड़मेर के घरों तक पहुंचाया जाएगा।
50 लाख लोगों को मिलेगा सालभर पानी
अधिकारियों का दावा है कि इस परियोजना से करीब 50 लाख लोगों को पूरे वर्ष पानी उपलब्ध कराया जा सकेगा। झील का कुल तल क्षेत्रफल लगभग 71 लाख वर्ग मीटर है और इसकी भंडारण क्षमता 1413 मिलियन क्यूबिक फीट बताई गई है। इसमें करीब 141 करोड़ लीटर पानी संग्रहित किया जा सकता है। अधिकारियों के अनुसार, झील इतनी विशाल है कि इसे एक छोर से दूसरे छोर तक पार करने में लगभग 24 घंटे लग सकते हैं।
Jaisalmer Lake: मुख्यमंत्री कर सकते हैं उद्घाटन
परियोजना को तैयार करने में करीब 400 मजदूरों और 10 इंजीनियरों की टीम ने लगातार काम किया। इंदिरा गांधी नहर से झील को जोड़ने के लिए पहले से मौजूद एस्केप चैनल को भी मजबूत बनाया गया है। जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा आगामी 9 जुलाई को इस परियोजना का उद्घाटन कर सकते हैं। इस झील को एशिया की सबसे बड़ी कृत्रिम झीलों में शामिल माना जा रहा है, जो भविष्य में राजस्थान के जल प्रबंधन की बड़ी मिसाल बन सकती है।








