Iran crisis: ईरान-यूएस युद्ध के बीच अब एक नया मोर्चा समंदर में खुलता नजर आ रहा है। चीन और अमेरिका के बीच तनाव उस वक्त बढ़ गया जब चीन ने पनामा के झंडे वाले कई जहाजों को रोककर हिरासत में ले लिया। इस कदम से अमेरिका नाराज़ हो गया और उसने इसे खुली “धमकाने वाली कार्रवाई” बताया है।
रूबियो का चीन पर हमला
अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने चीन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि पनामा ने हाल ही में अपने दो अहम बंदरगाहों का नियंत्रण एक हांगकांग से जुड़ी कंपनी से छीना था, जिसके बाद चीन ने पनामा-ध्वज वाले जहाजों को निशाना बनाना शुरू कर दिया। हालांकि चीन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है।
Iran crisis: पनामा नहर बना नया विवाद का केंद्र
Panama Canal अब अमेरिका और चीन की बड़ी रणनीतिक लड़ाई का केंद्र बन गया है। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump पहले ही आरोप लगा चुके हैं कि चीन इस नहर पर कब्जा जमाने की कोशिश कर रहा है। अमेरिका के लिए यह नहर व्यापार और सैन्य दोनों लिहाज से बेहद अहम मानी जाती है।
Iran crisis: मार्च में बढ़ी जहाजों की रोकथाम
रिपोर्ट्स के मुताबिक, मार्च में चीन के बंदरगाहों पर 124 जहाजों को रोका गया, जिनमें से करीब 75% पनामा के झंडे वाले थे। इन जहाजों को कुछ घंटों से लेकर कई दिनों तक रोका गया। यह संख्या पिछले महीनों के मुकाबले काफी ज्यादा है, जिससे अमेरिका की चिंता और बढ़ गई है।
पनामा पर बढ़ा दबाव
इस पूरे विवाद में Panama अब दो महाशक्तियों के बीच फंसता नजर आ रहा है। अमेरिका जहां चीन के प्रभाव को कम करना चाहता है, वहीं चीन भी अपने हितों को बचाने में जुटा है। हाल ही में पनामा की अदालत ने हांगकांग की कंपनी के एक बड़े कॉन्ट्रैक्ट को असंवैधानिक करार दिया था, जिसके बाद यह तनाव और बढ़ गया।
ग्लोबल ट्रेड पर असर का खतरा
Iran crisis: अमेरिका का कहना है कि इस तरह जहाजों को रोकना सप्लाई चेन को बिगाड़ सकता है और वैश्विक व्यापार पर बड़ा असर डाल सकता है। वहीं चीन इसे सामान्य प्रक्रिया बता रहा है। लेकिन साफ है कि समंदर में यह खींचतान आने वाले समय में बड़े टकराव का रूप ले सकती है।
ये भी पढ़े: म्यांमार में सेना प्रमुख मिन आंग ह्लाइंग बने राष्ट्रपति, विवादों के बीच चुनाव में बड़ी जीत







