Gold Prices Update: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ दो सप्ताह के संभावित सीजफायर की घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में अचानक तेज उछाल देखने को मिला है। बुधवार को शुरुआती कारोबार में ही स्पॉट गोल्ड करीब 2.3% उछलकर 4,811.66 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया। इससे एक दिन पहले मंगलवार को भी सोने की कीमत में 1.2% की बढ़त दर्ज की गई थी, लेकिन ट्रंप के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर किए गए पोस्ट ने बाजार में तेजी को और बढ़ा दिया।
ट्रंप ने अपने पोस्ट में साफ कहा कि अमेरिका अगले दो हफ्तों तक ईरान पर कोई हमला नहीं करेगा। इसके साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि उन्हें ईरान की ओर से 10 बिंदुओं वाला एक प्रस्ताव मिला है, जिसे बातचीत शुरू करने के लिए एक व्यावहारिक आधार माना जा सकता है। इस खबर के सामने आते ही निवेशकों ने सुरक्षित निवेश के रूप में सोने में दिलचस्पी बढ़ा दी और इसकी मांग तेजी से बढ़ गई।

क्या सोना 5000 डॉलर के स्तर को छू पाएगा?
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक सोने के लिए अगला अहम स्तर 4,930 डॉलर प्रति औंस माना जा रहा है। यदि बाजार में तेजी का यही रुख बना रहता है, तो आने वाले समय में सोना 5,000 डॉलर प्रति औंस के ऐतिहासिक आंकड़े को भी चुनौती दे सकता है।
युद्ध शुरू होने के बाद कीमतों का उतार-चढ़ाव
दिलचस्प बात यह है कि 28 फरवरी को ईरान युद्ध शुरू होने के बाद सोने की कीमतों में अब तक 8% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई थी। हालांकि अब युद्धविराम की संभावनाओं और ऊर्जा संकट से जुड़ी अनिश्चितताओं ने निवेशकों को फिर से सोने की ओर आकर्षित कर दिया है और यह एक बार फिर सुरक्षित निवेश के रूप में उभर रहा है।

Gold Prices Update: अन्य कीमती धातुओं में भी दिखी तेजी
सोने के साथ-साथ अन्य कीमती धातुओं की कीमतों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई। प्लेटिनम की कीमत करीब 2.4% बढ़कर 2,004.95 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई, जबकि पैलेडियम में भी 2.1% की बढ़त देखी गई और यह लगभग 1,500 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर पहुंच गया।
कच्चे तेल की कीमतों में आई बड़ी गिरावट
सीजफायर की घोषणा का असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी साफ दिखाई दिया। खबर सामने आने के कुछ ही घंटों के भीतर कच्चे तेल का भाव 117.63 डॉलर से गिरकर 91.05 डॉलर प्रति बैरल तक आ गया। करीब 20% की यह गिरावट कोरोना संकट के बाद की सबसे बड़ी गिरावटमानी जा रही है।
बाजार के जानकारों का कहना है कि युद्ध की आशंका के कारण तेल की कीमतों में जो अतिरिक्त तेजी आई थी, वह समझौते की खबर मिलते ही तेजी से खत्म हो गई।







