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ईरान ने अमेरिकी सैनिकों को ट्रैक करने के लिए अपनाई नई साइबर रणनीति, डेटा रोमिंग और SS7 तकनीक का इस्तेमाल

 Iran US Cyber War:

Iran US Cyber War: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच साइबर जंग भी तेज होती नजर आ रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरानी हैकर्स ने मिडिल ईस्ट के पुराने टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर की कमजोरियों का फायदा उठाकर अमेरिकी सैनिकों और सैन्य कॉन्ट्रैक्टर्स के मोबाइल फोन की लोकेशन ट्रैक करने की कोशिश की है।

Iran US Cyber War: SS7 पिंग के जरिए लोकेशन ट्रैक करने का दावा-

मोबाइल सर्विलांस मॉनिटर की रिपोर्ट के अनुसार, मिडिल ईस्ट के टेलीकॉम नेटवर्क पर बड़ी संख्या में SS7 पिंग भेजे गए। यह एक साइलेंट नेटवर्क रिक्वेस्ट होती है, जिसके जरिए यह पता लगाया जा सकता है कि कोई मोबाइल फोन एक्टिव है या नहीं और वह किस क्षेत्र में रोमिंग कर रहा है।

Iran US Cyber War: साइबर रिसर्चर्स ने जताई चिंता-

संस्था के संस्थापक और साइबर सिक्योरिटी रिसर्चर गैरी मिलर ने दावा किया कि यह गतिविधि किसी संगठित साइबर ऑपरेशन की ओर इशारा करती है। वहीं, रिपोर्ट के अनुसार कुछ ट्रैकिंग प्रयासों का संबंध एक ईरानी मोबाइल ऑपरेटर से भी जोड़ा गया है।

Iran US Cyber War: युद्ध के दौरान बढ़ी साइबर गतिविधियां-

बताया गया कि यह गतिविधियां उस समय सामने आईं जब अमेरिका और इजरायल, ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की तैयारी कर रहे थे। इसी दौरान ईरान ने क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले भी किए थे।

कमर्शियल लोकेशन डेटा भी बना चिंता का विषय-

रिपोर्ट में कहा गया है कि स्मार्टफोन के Advertising ID और कमर्शियल लोकेशन डेटा का इस्तेमाल कर किसी खास डिवाइस की गतिविधियों पर नजर रखी जा सकती है। अमेरिकी सांसदों ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया है।

CENTCOM ने सुरक्षा उपायों का किया दावा-

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कांग्रेस को बताया कि उसे दुश्मन देशों द्वारा कमर्शियल लोकेशन डेटा के जरिए सैनिकों को निशाना बनाने की आशंका से जुड़ी कई रिपोर्ट मिली हैं। हालांकि, सेना ने कहा कि सुरक्षा के लिए विशेष उपाय किए गए हैं, जिनका खुलासा सार्वजनिक रूप से नहीं किया जा सकता

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