Noida Violence: नोएडा में हाल ही में श्रमिक प्रदर्शन के दौरान भड़की हिंसा ने अब एक बड़ा और चिंताजनक मोड़ ले लिया है। पुलिस जांच में सामने आया है कि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे विदेशी साजिश के संकेत मिले हैं, जिसमें पाकिस्तान से संचालित सोशल मीडिया अकाउंट्स की भूमिका उजागर हुई है। जांच एजेंसियां इसे न सिर्फ कानून-व्यवस्था से जुड़ा मामला मान रही हैं, बल्कि प्रदेश सरकार की छवि को प्रभावित करने की कोशिश के तौर पर भी देख रही हैं।
पाकिस्तान से सोशल मीडिया के जरिए भड़काऊ अभियान
पुलिस के अनुसार, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व ट्विटर) पर @Proudindiannavi और @Mir_Ilyas_INC नाम के अकाउंट्स से लगातार भड़काऊ पोस्ट किए जा रहे थे। जांच में पाया गया कि ये अकाउंट्स पाकिस्तान से ऑपरेट हो रहे थे और इनका मकसद नोएडा में श्रमिकों को उकसाना था। इन दोनों हैंडल्स के खिलाफ FIR दर्ज कर ली गई है।
यूपी : नोएडा उपद्रव मामले में पुलिस ने मार्क्सवादी संगठन “मजदूर बिगुल दस्ता” के मनीषा और रुपेश को गिरफ्तार किया। आरोप है कि यह संगठन पिछले कई दिन से फैक्ट्रियों में घूमकर मजदूरों को भड़का रहा था, जिसके बाद उपद्रव हुआ। https://t.co/SVRpIEFSWX pic.twitter.com/FzTupZ4FSH
— Sachin Gupta (@Sachingupta) April 16, 2026
Noida Violence: VPN के जरिए पहचान छिपाने की कोशिश
साइबर सेल की जांच में ये भी पता चला कि अकाउंट संचालक VPN का इस्तेमाल कर अपनी लोकेशन छिपाने की कोशिश कर रहे थे। हालांकि, तकनीकी जांच के जरिए उनकी वास्तविक लोकेशन का पता लगा लिया गया। पुलिस का कहना है कि यह पहली बार नहीं है। इन अकाउंट्स का इतिहास पहले भी भड़काऊ कंटेंट फैलाने का रहा है। इस मामले में कम्युनिस्ट संगठन ‘मजदूर बिगुल दस्ता’ से जुड़े मनीषा चौहान और रुपेश रॉय को भी गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के मुताबिक, इन दोनों ने मौके पर मौजूद श्रमिकों को भड़काने में सक्रिय भूमिका निभाई और माहौल को हिंसक बनाने में योगदान दिया।
62 गिरफ्तार, 13 FIR दर्ज
आपको बता दें कि इस मामले में पुलिस अब तक 13 मुकदमे दर्ज कर चुकी है। 62 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। जांच एजेंसियों का मानना है कि हिंसा में शामिल असली चेहरे आम मजदूर नहीं, बल्कि वे बाहरी तत्व हैं जो पर्दे के पीछे से पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहे थे। जबकि जांच में यह एंगल भी सामने आया है कि इस तरह की घटनाओं के जरिए उत्तर प्रदेश सरकार, खासकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कानून-व्यवस्था की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही थी। औद्योगिक शहर नोएडा में अशांति फैलाकर एक बड़ा संदेश देने की रणनीति पर भी सवाल उठ रहे हैं।








