UP News: पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल गरमाते ही प्रशासनिक स्तर पर भी हलचल तेज हो गई है। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश कैडर के चर्चित आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा की ऑब्जर्वर के रूप में तैनाती ने सियासी और प्रशासनिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। सख्त छवि और तेज़ एक्शन के लिए पहचाने जाने वाले शर्मा की यह जिम्मेदारी बेहद अहम मानी जा रही है।
क्यों खास है यह तैनाती?
बंगाल चुनाव को संवेदनशील मानते हुए चुनाव आयोग आमतौर पर ऐसे अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपता है जिनकी छवि निष्पक्ष, कड़क और निर्णायक हो। अजय पाल शर्मा का ट्रैक रिकॉर्ड बिल्कुल इसी प्रोफाइल में फिट बैठता है। उत्तर प्रदेश में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई जिलों में कानून-व्यवस्था को मजबूती से संभाला और अपराध पर सख्त नियंत्रण स्थापित किया।
शर्मा को अक्सर उन इलाकों में तैनात किया गया जहां हालात बेहद चुनौतीपूर्ण रहे। अपराध नियंत्रण हो या बड़े प्रशासनिक आयोजन हर मोर्चे पर उन्होंने अपनी मजबूत पकड़ दिखाई। यही वजह है कि उन्हें अब बंगाल जैसे संवेदनशील राज्य में जिम्मेदारी सौंपना एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है।
UP News: कौन हैं अजय पाल शर्मा?
पंजाब के लुधियाना के रहने वाले अजय पाल शर्मा पढ़ाई में शुरू से ही अव्वल रहे। हाईस्कूल में स्टेट टॉपर रहने के बाद उन्होंने पटियाला से डेंटल सर्जरी (BDS) की पढ़ाई की और कुछ समय तक डॉक्टर के रूप में भी काम किया। इसके बाद उन्होंने सिविल सेवा की तैयारी शुरू की और 2011 में ऑल इंडिया रैंक 17 हासिल कर आईपीएस बने। अपने करियर में उन्होंने सहारनपुर, मथुरा, शामली, जौनपुर, नोएडा और रामपुर जैसे जिलों में एसपी/एसएसपी के रूप में सेवाएं दीं। खास तौर पर जौनपुर में 22 महीनों के दौरान 136 एनकाउंटर कर उन्होंने अलग पहचान बनाई, जिसके चलते उन्हें ‘सिंघम’ और ‘एनकाउंटर स्पेशलिस्ट’ जैसे नाम भी मिले।
बंगाल में क्यों बढ़ी अहमियत?
गौरतलब है कि पिछले साल महाकुंभ से पहले प्रयागराज में बतौर नोडल अधिकारी उनकी तैनाती ने यह साफ कर दिया था कि प्रशासन उन्हें बड़े और संवेदनशील जिम्मों के लिए भरोसेमंद मानता है। ऐसे में बंगाल चुनाव में उनकी नियुक्ति को महज एक सामान्य पोस्टिंग नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था को सख्ती से बनाए रखने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
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