Iran crisis: ईरान ने शुक्रवार को बड़ा एलान करते हुए कहा कि अमेरिका के साथ जारी सीजफायर के दौरान होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह खुला रहेगा और इस दौरान सभी कमर्शियल जहाजों को आने-जाने की पूरी अनुमति होगी। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागाची ने साफ किया कि यह फैसला सीजफायर की अवधि तक लागू रहेगा, जिससे वैश्विक व्यापार और खासकर तेल सप्लाई को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट
इस घोषणा का असर तुरंत ग्लोबल मार्केट पर दिखा और कच्चे तेल की कीमतों में जोरदार गिरावट आई। ब्रेंट क्रूड करीब 10% गिरकर 90 डॉलर से नीचे पहुंच गया, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड भी गिरकर लगभग 82 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गया। इससे पहले ईरान-अमेरिका-इजरायल तनाव के चलते तेल की कीमतें 120 डॉलर तक पहुंच गई थीं और दुनिया भर में ऊर्जा संकट गहराने लगा था।
Iran crisis: होर्मुज स्ट्रेट की अहमियत
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक है, जहां से करीब 20% वैश्विक तेल सप्लाई गुजरती है। इस रास्ते पर रुकावट आने से पूरी दुनिया की सप्लाई चेन प्रभावित हो जाती है, जिसका असर सीधे महंगाई और अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। हाल के संघर्ष में इस स्ट्रेट के बंद होने से इसे वैश्विक ऊर्जा संकट की सबसे बड़ी वजहों में से एक माना गया था।
Iran crisis: शेयर बाजारों में जोरदार उछाल
तेल की कीमतों में गिरावट के साथ ही दुनियाभर के शेयर बाजारों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। अमेरिका में डॉव जोन्स, S&P 500 और नैस्डैक जैसे प्रमुख इंडेक्स तेजी के साथ ऊपर चढ़े, वहीं यूरोप के बाजारों में भी करीब 2% तक उछाल दर्ज किया गया। निवेशकों को उम्मीद है कि अगर हालात ऐसे ही सुधरते रहे तो ग्लोबल इकोनॉमी में स्थिरता वापस आ सकती है।
सीजफायर पर बना सस्पेंस
हालांकि इस सकारात्मक खबर के बीच अनिश्चितता भी बनी हुई है, क्योंकि Donald Trump ने साफ किया है कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी नौसैनिक ब्लॉकेड अभी भी जारी रहेगा। यानी स्ट्रेट खुलने के बावजूद पूरी तरह सामान्य स्थिति अभी नहीं आई है और आगे की स्थिति काफी हद तक शांति वार्ता पर निर्भर करेगी।
आगे क्या संकेत मिल रहे हैं
Iran crisis: फिलहाल इस फैसले को सीजफायर के दौरान सबसे बड़ी राहत भरी खबर माना जा रहा है, जिससे संकेत मिल रहे हैं कि 28 फरवरी से शुरू हुआ यह संघर्ष अब खत्म होने की दिशा में बढ़ सकता है। अगर आने वाले दिनों में हालात और बेहतर होते हैं, तो न सिर्फ तेल की कीमतों में और गिरावट आ सकती है बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन भी धीरे-धीरे पटरी पर लौट सकती है, जिससे पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को बड़ा सहारा मिलेगा।
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