Women Reservation Bill: महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन बिल को लोकसभा में पारित कराने में केंद्र सरकार असफल रही। लंबी चर्चा और मतदान के बाद यह बिल आवश्यक बहुमत हासिल नहीं कर पाया और 54 वोटों से गिर गया। यह पिछले कई वर्षों में पहला अवसर है जब सरकार सदन में कोई महत्वपूर्ण विधेयक पारित कराने में नाकाम रही है, जिससे राजनीतिक माहौल गरमा गया है।
दो तिहाई बहुमत नहीं जुटा सकी सरकार
करीब 21 घंटे चली चर्चा के बाद इस विधेयक पर मतदान कराया गया, जिसमें 528 सांसदों ने हिस्सा लिया। बिल के पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि विपक्ष में 230 सांसदों ने मतदान किया। हालांकि, इस बिल को पारित कराने के लिए दो तिहाई बहुमत यानी 352 वोटों की आवश्यकता थी। इस तरह यह विधेयक 54 वोटों से गिर गया और सरकार को झटका लगा।

Women Reservation Bill: सीटों की संख्या बढ़ाने का था प्रावधान
इस संशोधन बिल में लोकसभा की सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव रखा गया था। इसका उद्देश्य भविष्य के परिसीमन और महिला आरक्षण को लागू करने के लिए आधार तैयार करना था। हालांकि, विपक्ष ने इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए इसे राजनीतिक संरचना में बदलाव की कोशिश बताया।
अन्य दो विधेयकों पर नहीं हुई वोटिंग
सरकार ने परिसीमन संशोधन संविधान विधेयक 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन विधेयक 2026 को मतदान के लिए पेश नहीं किया। सरकार का कहना था कि ये विधेयक आपस में जुड़े हुए हैं, इसलिए अलग से मतदान की आवश्यकता नहीं है। इस फैसले को लेकर भी विपक्ष ने सवाल उठाए।
Women Reservation Bill: विपक्ष ने बताया लोकतंत्र की जीत
विधेयक गिरने के बाद विपक्षी दलों ने इसे अपनी जीत बताया। विपक्ष के नेताओं ने कहा कि उन्होंने संविधान और लोकतंत्र की रक्षा की है। उनका तर्क था कि यह बिल महिला आरक्षण के नाम पर परिसीमन को लागू करने का प्रयास था, जिससे देश की राजनीतिक व्यवस्था प्रभावित होती। वहीं, गृह मंत्री अमित शाह ने पहले ही चेतावनी दी थी कि अगर बिल पास नहीं हुआ तो इसकी जिम्मेदारी विपक्ष की होगी और देश की महिलाएं इसका जवाब देंगी। इस पूरे घटनाक्रम के बाद संसद और देश की राजनीति में महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर बहस और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।








