us- iran peace talks: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ सीजफायर की अवधि अवश्य बढ़ा ली है, लेकिन ईरान को तबाह करने की उनकी नीति और नीयत न तो दुनिया को चैन से रहने देगी और न खुद ट्रंप को।सीजफायर के बीच भी एक तरह से युद्ध जारी है। ईरान के बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकेबंदी के साफ संकेत हैं कि ट्रंप सैन्य मोर्चे के साथ ही आर्थिक मोर्चे पर भी ईरान को कमजोर कर देने की रणनीति में हैं।शायद उन्हें लगता है कि यदि ईरान आर्थिक रूप से कमजोर हुआ, तो वह उसे अपनी शर्तों पर वार्ता की टेबल पर लाकर झुका सकते हैं। अभी ईरान का साफ कहना है उस पर युद्ध थोपा गया, उसका नुकसान किया गया, लिहाजा वार्ता उसकी शर्तों पर होगी।
कैसे प्रभावित हो सकता है ईरान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी युद्धविराम को बढ़ाने का ऐलान किया, लेकिन साथ ही नौसैनिक नाकेबंदी जारी रखने का आदेश भी दिया। ऐसे में युद्ध विराम टूटने की आशंकाएं बराबर बनी रहेंगी और दुनिया चैन से नहीं रह पाएगी। गौरतलब है कि अमेरिका ने 13 अप्रैल से ईरानी बंदरगाहों और तेल आपूर्ति को निशाना बनाते हुए व्यापक समुद्री नाकाबंदी लागू कर रखी है। इस नाकेबंदी के चलते अब तक कई जहाजों को वापस लौटने या रास्ता बदलने के लिए मजबूर होना पड़ा है। जानकारों के मुताबिक अमेरिकी नाकेबंदी का ईरान को आर्थिक नुकसान हो सकता है।ईरान की आर्थिक रीढ़ उसका तेल और गैस क्षेत्र (petroleum sector) है। खार्ग आईलैंड को ईरान की तेल इंडस्ट्री का दिल माना जाता है। यहां से देश के करीब 90 प्रतिशत तेल का निर्यात होता है।अगर यहां स्टोरेज भर जाता है और सप्लाई रुकती है, तो ईरान की आय पर सीधा असर पड़ जाएगा।अमेरिकी की निगाह शुरू से ही खार्ग पर टिकी हुई है।
us- iran peace talks: आर्थिक रूप से टूट रहा ईरान-ट्रंप
ईरान की आर्थिक रीढ़ तोड़ देने की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी मंशा एक तरह से जगजाहिर भी कर दी है।इस बीच उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा कि ईरान आर्थिक रूप से टूट रहा है और वहां की सेना और पुलिस को सैलरी तक नहीं मिल पा रही है।ईरान को प्रतिदिन करीब 500 मिलियन डॉलर का नुकसान झेल रहा है।ट्रंप के मुताबिक होर्मुज स्ट्रेट पर दबाव और समुद्री ब्लॉकेड की वजह से ईरान की कमाई लगभग रुक गई है और अब हालात इतने खराब हैं कि सुरक्षा बलों में भी नाराजगी है।ट्रंप की इस सोशल मीडिया पोस्ट के साफ मायने हैं कि वे चाहते हैं कि ईरान में इस कदर आर्थिक बदहाली हो जाए कि वहां के सुरक्षा बल नाराज होकर एक तरह से बगावत ही कर दें। वहां की जनता त्राहिमाम करने को विवश हो जाए। ऐसे हालात में ईरान की सत्ता वार्ता के लिए मजबूर हो जाए।
us- iran peace talks: अड़ा हुआ है ईरान
ईरान को आर्थिक रूप से कमजोर करने की ट्रंप की नीयत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वे दुनिया के मुल्कों को धमका रहे हैं कि ईरान की आर्थिक मदद न करें। उनकी दो टूक चेतावनी है कि ईरान को आर्थिक मदद पहुंचाने की कोशिश करने वाले किसी भी जहाज या शख्स पर अमेरिका कार्रवाई करेगा। साफ है कि अमेरिका सैन्य के साथ ही आर्थिक मोर्चे पर लड़ने को भी गंभीर है। ईरान के गंभीर आर्थिक हालात को लेकर ट्रंप ने सोशल मीडिया के जरिये जो दावा किया, उस पर दुनिया के लोग आँख मूंदकर विश्वास नहीं कर सकते हैं, लेकिन इतना अवश्य है कि होर्मुज स्ट्रेट और तेल कारोबार को लेकर जो दबाव बनाया जा रहा है, उससे ईरान की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
एक तरफ अमेरिका ईरान के बंदरगाहों से नाकाबंदी नहीं हटाना चाहता, तो दूसरी ओर ईरान भी अड़ा हुआ है कि बातचीत से पहले अमेरिका नाकाबंदी हटाए। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका पर युद्धविराम का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी “युद्ध का कृत्य” है। यह एक व्यावसायिक जहाज पर हमला और उसके चालक दल को बंधक बनाना इससे भी बड़ा उल्लंघन है।








