Sita Navami 2026: बैशाख शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को देवी सीता के जन्मदिन के रूप में सीता नवमी (सीता जयंती) मनाई जाती है। इस दिन विवाहित महिलाएं व्रत रखती हैं और अपने पति की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और सौभाग्य के लिए प्रार्थना करती हैं।
पौराणिक मान्यता और तिथि
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी सीता का जन्म मंगलवार को पुष्य नक्षत्र में हुआ था। उनका विवाह भगवान श्रीराम से हुआ, जिनका जन्म चैत्र शुक्ल नवमी को माना जाता है। इसी कारण रामनवमी के लगभग एक महीने बाद सीता नवमी आती है।इस वर्ष यह पर्व 25 अप्रैल, शनिवार को मनाया जाएगा।

माता सीता का महत्व
माता सीता को पवित्रता, त्याग और धैर्य का प्रतीक माना जाता है। उनका आशीर्वाद घर में सुख-शांति बनाए रखता है और पति-पत्नी के रिश्ते को मजबूत बनाता है।
इस दिन सूर्योदय सुबह 5:46 बजे और सूर्यास्त शाम 6:53 बजे होगा।चंद्रमा का उदय दोपहर 1:09 बजे और अस्त 26 अप्रैल की सुबह 2:31 बजे होगा।
Sita Navami 2026: शुभ मुहूर्त
अभिजित मुहूर्त दोपहर 11:53 बजे से 12:46 बजे तक रहेगा।विजय मुहूर्त दोपहर 2:30 बजे से 3:23 बजे तक रहेगा।इन दोनों मुहूर्तों का एक साथ होना बहुत शुभ माना जाता है। इस समय पूजा, व्रत की शुरुआत, मंत्र जाप या कोई भी शुभ कार्य करने से विशेष लाभ मिलता है।
ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:19 बजे से 5:02 बजे तक रहेगा।गोधूलि मुहूर्त शाम 6:51 बजे से 7:13 बजे तक रहेगा।अमृत काल शाम 6:29 बजे से 8:04 बजे तक रहेगा, जो बेहद शुभ माना जाता है।

अशुभ समय (इनमें काम न करें)
राहुकाल सुबह 9:03 बजे से 10:41 बजे तक रहेगा, इस दौरान कोई शुभ कार्य शुरू नहीं करना चाहिए।यमगंड दोपहर 1:58 बजे से 3:36 बजे तक रहेगा।गुलिक काल सुबह 5:46 बजे से 7:24 बजे तक रहेगा।
दुर्मुहूर्त सुबह 5:46 बजे से 6:38 बजे तक और फिर 6:38 बजे से 7:31 बजे तक रहेगा।वर्ज्य समय सुबह 8:57 बजे से 10:32 बजे तक रहेगा, जिसे भी अशुभ माना जाता है।
विशेष योग और बाण
आडल योग सुबह 5:46 बजे से शाम 8:04 बजे तक रहेगा।इसके बाद विडाल योग शुरू होकर 26 अप्रैल की सुबह 5:45 बजे तक चलेगा।गंड मूल पूरे दिन रहेगा।बाण की स्थिति में दोपहर 3:51 बजे तक मृत्यु बाण रहेगा और उसके बाद अग्नि बाण लग जाएगा।
ये भी पढ़ें…झाबुआ अपमान कांड पर मानवाधिकार आयोग सख्त, रिपोर्ट तलब








