Women Reservation: उत्तर प्रदेश विधानसभा के विशेष सत्र में गुरुवार को महिला आरक्षण के मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस और टकराव देखने को मिला। सदन का माहौल काफी गरम रहा, जहां दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर जमकर निशाना साधा।
सपा का विरोध प्रदर्शन
समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायक हाथों में तख्तियां लेकर सदन की गैलरी में पहुंचे और 33 प्रतिशत महिला आरक्षण को जल्द लागू करने की मांग उठाई। उन्होंने जोरदार नारेबाजी करते हुए आरोप लगाया कि सरकार इस मुद्दे को लेकर गंभीर नहीं है। सपा नेताओं का कहना था कि महिला आरक्षण से जुड़ा विधेयक पहले ही पास हो चुका है, लेकिन इसे लागू करने में जानबूझकर देरी की जा रही है। कार्यवाही शुरू होने से पहले ही सपा विधायक नारे लिखी पट्टियां लेकर विरोध करते नजर आए।
Women Reservation: भाजपा का जवाब और समर्थन
वहीं, भाजपा के विधायक भी पीछे नहीं रहे। खासकर महिला विधायक अलग-अलग भाषाओं में लिखी तख्तियां लेकर सदन में पहुंचीं और “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” के समर्थन में नारे लगाए। उन्होंने इस कानून को महिलाओं के सशक्तीकरण की दिशा में बड़ा कदम बताया।
विपक्ष और सरकार आमने-सामने
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह महिला आरक्षण लागू नहीं करना चाहती, जबकि यह विधेयक पहले ही पारित हो चुका है। इसके जवाब में सरकार के मंत्रियों ने विपक्ष की आलोचना की। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि सदन में महिला आरक्षण के समर्थन में सरकार अपनी बात मजबूती से रखेगी और विपक्ष की सच्चाई सामने लाएगी।
सरकार का पलटवार
मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि पूरा दिन महिला सशक्तीकरण पर चर्चा के लिए रखा गया है। वहीं, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने विपक्ष पर आरोप लगाते हुए कहा कि जो लोग महिला आरक्षण में रुकावट डालते हैं, उन्हें जनता राजनीतिक जवाब देगी। मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने भी कहा कि विपक्ष के पास सरकार के खिलाफ कोई ठोस मुद्दा नहीं है।
राजनीतिक संदेश और भविष्य की रणनीति
मंत्री अनिल राजभर ने कहा कि यह सत्र महिलाओं को यह समझाने का मौका है कि कौन उनके हित में काम कर रहा है और कौन नहीं। वहीं, धर्मपाल सिंह ने दावा किया कि आने वाले 2027 चुनाव में महिलाएं विपक्ष को जवाब देंगी। स्वतंत्र देव सिंह ने भी कहा कि जनता भविष्य में सपा और कांग्रेस को सबक सिखाएगी।
इस विशेष सत्र में हुए तीखे टकराव से साफ है कि महिला आरक्षण का मुद्दा अभी भी प्रदेश की राजनीति में अहम बना हुआ है। आने वाले समय में भी इस पर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।








