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अमेरिकी एविएशन सेक्टर पर भी दिखने लगा है पश्चिम एशिया संकट का असर, 34 साल पुरानी एयरलाइंस की उड़ानें बंद

Washington: अमेरिकी एविएशन सेक्टर पर भी दिखने लगा है पश्चिम एशिया संकट का असर, 34 साल पुरानी एयरलाइंस की उड़ानें बंद

Washington:  ईरान संघर्ष का असर अमेरिकी एविएशन सेक्टर में भी दिखने लगा है। शनिवार को अमेरिकी कंपनी स्पिरिट एयरलाइंस ने उड़ानें बंद करने का ऐलान कर दिया। कंपनी 34 साल इस सेक्टर में गुजार चुकी है लेकिन वर्तमान हालात में उसने हाथ खड़े कर दिए हैं।

कारोबार बंद करने का ऐलान

स्पिरिट एयरलाइंस कंपनी ने शनिवार को अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर घोषणा की कि वो अपना कारोबार बंद कर रही है और तुरंत ही अपनी सभी उड़ानें रोक रही है। एयरलाइन ने ग्राहकों को दिए एक नोटिस में कहा, “सभी उड़ानें रद्द कर दी गई हैं, और अब कस्टमर सर्विस भी उपलब्ध नहीं है।”
विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर एयरलाइन ने बताया कि उसके बुकिंग प्लेटफॉर्म की जगह अब रिफंड और आगे की कार्रवाई के बारे में जानकारी दी जा रही है। स्पिरिट को ईंधन की बढ़ती कीमतों, बढ़ते खर्चों और यात्रा की मांग में आए बदलावों के कारण काफी दबाव का सामना करना पड़ रहा था। इस साल तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से उसकी स्थिति कमजोर होने से पहले, उसने दिवालियापन से बाहर निकलने की भी योजना बनाई थी।इसकी मूल वजह जेट फ्यूल की कीमतों में वृद्धि बताई जा रही है। एयरलाइन ने कहा, “हमें पिछले 34 वर्षों में बेहद कम लागत वाले मॉडल को प्रस्तुत करने पर गर्व है, और हमें उम्मीद थी कि हम आने वाले कई वर्षों तक अपने मेहमानों की सेवा करते रहेंगे।”

Washington: 17,000 लोग बेरोजगार हुए

एयरलाइन ने दो साल से भी कम समय में दो बार दिवालिया होने के लिए अर्जी दी थी। सरकार से आर्थिक मदद पाने की कोशिशें नाकाम रहीं, जिसके चलते करीब 17,000 लोग बेरोजगार हो गए।
रॉयटर्स के अनुसार, यह शटडाउन ऋण देने वाले और अमेरिकी सरकार के साथ एक प्रस्तावित बेलआउट पैकेज को लेकर चल रही बातचीत असफल रहने के बाद हुआ है; इसके चलते एयरलाइन के पास अपने ऑपरेशन्स जारी रखने के लिए कोई नई पूंजी नहीं बची थी।
स्पिरिट ने कहा कि फंडिंग के सभी प्रयास विफल होने के बाद उसके पास ऑपरेशन्स बंद करने के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचा था। राष्ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने कहा कि उनकी सरकार ने एयरलाइन को दिवालिया होने से बचाने के लिए टैक्‍सपेयर्स के पैसे से अधिग्रहण का ‘अंतिम प्रस्ताव’ दिया था, लेकिन समझौता नहीं हो पाया।

ईरान पर अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को संयुक्त हमले शुरू किए। इस वजह से तेल की कीमतें बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल से भी ऊपर पहुंच गई हैं। संघर्ष से दुनिया परेशान है। ऊर्जा की सप्लाई में रुकावट से आर्थिक हालात बिगड़ रहे हैं।

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