दूसरे विश्व युद्ध से जर्मनी में हैं अमेरिकी सैनिक
शीत युद्ध शुरू होने तक जर्मनी में अमेरिकी मौजूदगी लगातार कम होती रही। इस दौरान, अमेरिकी सेना का मकसद नाजीवाद को खत्म करने से बदलकर जर्मनी को फिर से खड़ा करना हो गया, ताकि वह सोवियत संघ के खिलाफ एक मजबूत दीवार की तरह खड़ा हो सके। 1949 में नाटो और पश्चिमी जर्मनी के बनने के साथ ही, ये मिलिट्री बेस हमेशा के लिए वहीं जम गए।
शीत युद्ध के चरम पर, अमेरिका जर्मनी में करीब 50 बड़े बेस और 800 से ज़्यादा जगहों से अपना काम चला रहा था। इनमें बड़े-बड़े हवाई अड्डों और बैरकों से लेकर जासूसी करने वाले ठिकाने तक शामिल थे। 1989 में बर्लिन की दीवार गिरने और उसके दो साल बाद सोवियत संघ की टूट के बाद से, इनमें से कई बेस बंद हो चुके हैं।
1960, 1970 और 1980 के दशकों में, जर्मनी में अमेरिकी सैनिकों की संख्या अक्सर 2,50,000 से अधिक रहती थी। इसके अलावा, लाखों लोग—यानी सैनिकों के परिजन—इन बेस के अंदर या आस-पास ही रहते थे। ये बेस धीरे-धीरे अपने आप में पूरे-पूरे अमेरिकी शहरों जैसे बन गए थे, जहां उनके अपने स्कूल, दुकानें और सिनेमाघर मौजूद थे।
Washington/Berlin: यूरोप में 68,000 अमेरिकी सैनिक
जर्मनी स्थित स्टटगार्ट मुख्यालय यूनाइटेड स्टेट्स यूरोपियन कमांड और यूनाइटेड स्टेट्स अफ्रीका कमांड का केंद्र है, जो यूरोप और अफ्रीका में अमेरिकी सैन्य अभियानों का संचालन करते हैं। इसके अलावा, रामस्टीन एयरबेस अमेरिका की यूरोप स्थित वायुसेना का मुख्यालय है, जहां करीब 8,500 वायुसेना कर्मी तैनात हैं।
बवेरिया क्षेत्र में ग्राफेनवोहर, विलसेक और होहेनफेल्स जैसे अड्डे यूरोप के सबसे बड़े अमेरिकी सैन्य प्रशिक्षण क्षेत्रों में शामिल हैं। वहीं, विस्बाडेन में अमेरिकी सेना यूरोप और अफ्रीका का मुख्यालय स्थित है। लैंडस्टूल मेडिकल सेंटर अमेरिका के बाहर सबसे बड़ा सैन्य अस्पताल माना जाता है।
Washington/Berlin: सैन्य अड्डों की भूमिका
ट्रंप पहले भी जर्मनी में तैनात सैनिकों को लेकर सख्त रुख अपना चुके हैं। 2020 में अपने पहले कार्यकाल के दौरान उन्होंने जर्मनी को “अपराधी” बताते हुए वहां से सैनिकों की संख्या एक-तिहाई घटाने की बात कही थी। उस समय उन्होंने जर्मनी के कम रक्षा खर्च और नॉर्ड स्ट्रीम 2 गैस पाइपलाइन को समर्थन देने पर नाराजगी जताई थी।
हालांकि, ट्रंप की उस घोषणा ने पेंटागन (अमेरिकी रक्षा मंत्रालय), नाटो और जर्मन अधिकारियों को चौंका दिया था, क्योंकि इस बारे में पहले कोई औपचारिक जानकारी साझा नहीं की गई थी। योजना के तहत कुछ सैनिकों को अमेरिका वापस बुलाने और कुछ को पोलैंड और इटली में तैनात करने का प्रस्ताव था, लेकिन इस कदम को अमेरिकी कांग्रेस में दोनों दलों के विरोध और भारी लॉजिस्टिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा। बाद में जो बाइडेन ने 2021 में इस योजना को रोक दिया और अंततः इसे रद्द कर दिया।








