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मध्य प्रदेश में बड़ी प्रशासनिक सर्जरी: 62 IPS अधिकारियों का तबादला, कई जिलों के SP बदले, जानिए किसे कहाँ मिली पोस्टिंग

MP IPS TRANSFER: मध्य प्रदेश में पुलिस प्रशासन में बड़ा बदलाव करते हुए गृह विभाग ने 62 आईपीएस अधिकारियों के तबादले कर दिए हैं। शनिवार देर रात जारी आदेशों से राज्य स्तर से लेकर जिला स्तर तक पुलिस व्यवस्था में व्यापक फेरबदल हुआ है।

वरिष्ठ स्तर पर अहम बदलाव

आदेश के अनुसार, रवि कुमार गुप्ता को विशेष डीजीपी (प्रशिक्षण) के साथ भौरी स्थित पुलिस अकादमी का निदेशक बनाया गया है। राजाबाबू सिंह को एडीजीपी रेलवे की जिम्मेदारी सौंपी गई है। डीपी गुप्ता को सामुदायिक पुलिसिंग, आरटीआई, सार्वजनिक सेवा गारंटी और अनुसंधान एवं विकास जैसे महत्वपूर्ण विभाग दिए गए हैं, जबकि सोलोमन यश कुमार मिंज को कंप्लेंट सेल, मानवाधिकार और कल्याण से जुड़े कार्य सौंपे गए हैं।

MP IPS TRANSFER: डीआईजी स्तर पर तबादले

अमित सिंह को इंदौर रेंज में सशस्त्र बल का डीआईजी बनाया गया है। अवधेश कुमार गोस्वामी और प्रशांत खरे को पुलिस मुख्यालय में पदस्थ किया गया है। वीरेंद्र कुमार सिंह को नर्मदापुरम रेंज का डीआईजी नियुक्त किया गया है। इसके अलावा मनीष कुमार अग्रवाल, मनोज कुमार राय, रियाज इकबाल, राहुल कुमार लोढ़ा और सिमाला प्रसाद को भी डीआईजी स्तर पर अलग-अलग जिम्मेदारियां दी गई हैं।

जिला और फील्ड पोस्टिंग में बड़ा बदलाव

राज्य के कई जिलों में पुलिस अधीक्षकों (SP) और डीसीपी स्तर पर भी बदलाव किए गए हैं। सूरज कुमार वर्मा को भिंड, यांगचेन डोलकर भूटिया को शिवपुरी, गुरुकरण सिंह को रीवा और अनुराग सुजानिया को सागर का एसपी बनाया गया है।

इसी तरह रजत सकलेचा (छतरपुर), अगम जैन (खंडवा), देवेन्द्र पाटीदार (झाबुआ), राजेश व्यास (नीमच), मयूर खंडेलवाल (दतिया) और सोनाक्षी सक्सेना (सीहोर) को भी नए जिलों की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

शहरी क्षेत्रों में भी फेरबदल

इंदौर और भोपाल जैसे बड़े शहरों में भी बदलाव किए गए हैं। अमन सिंह राठौड़, विकास कुमार सहवाल, आयुष गुप्ता और आदर्शकांत शुक्ला को डीसीपी के रूप में तैनात किया गया है।

व्यापक असर

इस बड़े प्रशासनिक फेरबदल से राज्य की कानून-व्यवस्था, पुलिसिंग रणनीति और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर व्यापक असर पड़ने की उम्मीद है। माना जा रहा है कि सरकार ने बेहतर समन्वय और कार्यक्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से यह कदम उठाया है। गृह विभाग के इस निर्णय को आगामी प्रशासनिक चुनौतियों और कानून-व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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