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टीएमसी का ‘हृदय माछे काबा, नयन-ए-मदीना’ गीत हुआ फुस्स, भाजपा का ‘जय मां काली’ रहा सुपरहिट

West Bengal Assembly Election Results:  टीएमसी का 'हृदय माछे काबा, नयन-ए-मदीना' गीत हुआ फुस्स, भाजपा का 'जय मां काली' रहा सुपरहिट
West Bengal Assembly Election Results: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के परिणाम आने शुरू हुए तो रुझानों के बाद से ही देश भर में एक गाने की खूब चर्चा होने लगी। हालांकि, इस गाने ने चुनाव प्रचार के दौरान भी खूब राजनीतिक सरगर्मी बढ़ाई थी।
बांग्लादेश के मशहूर कवि अब्दुल रहमान बोयाती, जो अविभाजित बंगाल में पैदा हुए थे, उनका एक लोकगीत ‘हृदय माछे काबा, नयन-ए-मदीना’ मानो बंगाल की सियासत के केंद्र में हो, अभिनेत्री से नेता बनी सयानी घोष ने चुनाव प्रचार के दौरान इस लोकगीत को मुस्लिम बहुल इलाकों में रैलियों के दौरान गाकर राजनीतिक सनसनी फैला दी थी। इस पर बंगाल चुनाव के दौरान खूब राजनीतिक बहस हुई और अब इसका नतीजा टीएमसी को भुगतना पड़ा।

टीएमसी को नुकसान

दरअसल, भाजपा ममता बनर्जी की टीएमसी पर जो चुनाव प्रचार के दौरान तृष्टीकरण की राजनीति का इल्जाम लगा रही थी। सयानी के मंच से गाए जा रहे इस गाने ‘हृदय माछे काबा, नयन-ए-मदीना’ को जनता ने उसी का प्रतिबिंब मान लिया। ऐसे में ममता बनर्जी का पश्चिम बंगाल में मां, माटी और मानुष का नारा भी इस बार इसके आगे कुछ काम नहीं आया और भाजपा टीएमसी को इस बार घेरने में कामयाब रही।

बंगाल के चुनाव में इस बार मां, माटी और मानुष के नारे के साथ ही महिला सुरक्षा, घुसपैठिया, वोटर सत्यापन, जय बांग्ला बनाम जय श्रीराम का नारा गूंजता रहा। लेकिन, इस सबके बीच ‘हृदय माछे काबा, नयन-ए-मदीना’ ने जो सेंध टीएमसी को लगाई उससे संभलने के लिए अब उसे 5 साल का इंतजार करना होगा।
काली की भूमि से काबा का नारा पश्चिम बंगाल के वोटरों को रास नहीं आया। दुर्गा पूजा के पंडाल में ममता की उपस्थिति में भी यही गाना गाया गया था, तब से लेकर अब चुनावी रैलियों में जिस तरह से टीएमसी के नेता इसको चुनावी नारे की तरह इस्तेमाल कर रहे थे, उसको पचा पाना राज्य की जनता के लिए थोड़ा मुश्किल था।

West Bengal Assembly Election Results:  बंगाल की आत्मा है मां काली

दूसरी तरफ बिहार विधानसभा चुनाव में भाजपा की प्रचंड जीत के बाद जश्न के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा था, ”गंगा जी बिहार से होकर बंगाल तक बहती हैं। बिहार की जीत ने पश्चिम बंगाल में विजय का रास्ता खोल दिया है।” मतलब, गंगा जहां से निकलती है यानी उत्तराखंड से होते हुए, उत्तर प्रदेश, बिहार और अब पश्चिम बंगाल में गंगा सागर जहां गंगा समुद्र में मिलती है। वहां तक की सत्ता पर भाजपा ने कब्जा कर लिया है। हिंदुत्व की राजनीति पश्चिम बंगाल की जनता को भी पसंद आ गई और वह भाजपा के साथ हो गई।

इस बार के पश्चिम बंगाल चुनाव में स्थानीय मुद्दों से ज्यादा धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीकों को लेकर नैरेटिव तैयार किए गए। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने टीएमसी के इस गाने ‘हृदय माछे काबा, नयन-ए-मदीना’ को राजनीतिक रूप से भुनाने की कोशिश की और वह इसमें सफल भी रही। अमित शाह और योगी आदित्यनाथ जैसे भाजपा के स्टार प्रचारकों ने इसे पश्चिम बंगाल में ‘काली बनाम काबा’ के रूप में पेश किया। उनका कहना था कि टीएमसी के दिल में काबा-मदीना हो सकता है, लेकिन बंगाल की आत्मा में मां काली और मां दुर्गा का वास है।

इस बार के चुनाव में भाजपा ने ‘जय श्री राम’ के साथ-साथ ‘जय मां काली’ के नारे को भी प्रमुखता से आगे बढ़ाया। भाजपा टीएमसी पर यह आरोप लगाती रही कि ‘बंगाली अस्मिता’ की बात करने वाली ममता बनर्जी की पार्टी वास्तव में काबा और मदीना को बंगाल पर थोपने का प्रयास कर रही है।

पश्चिम बंगाल की चुनावी जंग में बंगाली पहचान का हिस्सा ‘माछ और भात’ भी छाया रहा। पुरुलिया में ममता बनर्जी ने एक सभा के दौरान कहा था, ”अगर भाजपा सत्ता में आई, तो वे आपको मछली, मांस और अंडा नहीं खाने देंगे। भाजपा एक ‘शाकाहारी संस्कृति’ वाली पार्टी है, जो माछ-भात बंगाली की अस्मिता को खत्म करना चाहती है।”

भाजपा ने ममता के इस वार का जवाब दिया और बंगाल में पार्टी के नेताओं ने ‘शाक्त परंपरा’ (शक्ति की पूजा) का दामन थामा। अनुराग ठाकुर और मनोज तिवारी जैसे दिग्गज नेताओं ने सार्वजनिक रूप से मछली खाकर यह संदेश दिया कि वे बंगाली संस्कृति के विरोधी नहीं हैं। कई क्षेत्रों में भाजपा उम्मीदवारों ने अपने चुनाव प्रचार के दौरान हाथ में मछली लेकर जुलूस निकाला।

West Bengal Assembly Election Results:  महिला वोटर अहम साबित हुए

महिला वोटर इस चुनाव के दौरान दोनों ही पार्टियों के केंद्र में रहीं। महिला वोटर्स को साधने के लिए तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने महिलाओं के लिए पहले से चल रही ‘लक्ष्मीर भंडार’ योजना के तहत महिलाओं को मिलने वाली 1,000 रुपए की राशि को ठीक चुनाव से पहले फरवरी में बढ़ाकर 1,500 रुपए कर दिया। वहीं, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इससे एक कदम आगे बढ़ते हुए सत्ता में आने पर महिलाओं को हर महीने 3,000 रुपए देने का वादा किया है। इसके अलावा, भाजपा ने सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा और सरकारी नौकरियों में 33 प्रतिशत आरक्षण देने का भी वादा किया।

दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले केंद्र सरकार ने संसद का विशेष सत्र बुलाकर महिला आरक्षण को जल्द लागू करने के लिए विधेयक पेश किए। हालांकि, विपक्ष के विरोध के चलते ये बिल पास नहीं हो सके। भाजपा ने इसे चुनावी मुद्दा बना दिया और जनता को बता दिया कि कांग्रेस और टीएमसी समेत पूरा विपक्ष इसका विरोध कर रहा है। इसके साथ ही ममता एक पुराने बयान, जिसमें उन्होंने महिलाओं को रात में बाहर न निकलने की सलाह दी थी, उसके बदले पानीहाटी की रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दावा किया कि भाजपा की सरकार पश्चिम बंगाल में बनी तो बंगाल की महिलाओं को रात 2 बजे भी बाहर निकलने में डर नहीं लगेगा।

West Bengal Assembly Election Results: संदेशखाली और मेडिकल कॉलेज 

वैसे पिछले कुछ सालों में संदेशखाली और आरजी कर मेडिकल कॉलेज जैसी घटनाओं ने राज्य सरकार की महिला सुरक्षा की छवि को प्रभावित किया। भाजपा ने इस आंदोलन से जुड़े चेहरों को चुनावी मैदान में उतारा। संदेशखाली आंदोलन की प्रमुख चेहरा रेखा पात्रा को हिंगलगंज सीट से और आरजी कर मामले में पीड़िता की मां रत्ना देबनाथ को पानीहाटी सीट से भाजपा ने मैदान में उतार दिया।

इसके साथ ही बंगाल चुनाव में सबसे बड़ा मुद्दा वोटर लिस्ट में हुआ बदलाव रहा। राज्य में कुल रजिस्टर्ड वोटर्स की संख्या पहले 7.66 करोड़ थी, लेकिन चुनाव से पहले हुए स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के बाद करीब 91 लाख वोटरों के नाम लिस्ट से हटाए गए। इसके बाद कुल वोटर्स की संख्या घटकर 6.75 करोड़ रह गई, यानी इसमें लगभग 11.8 प्रतिशत की कमी आई।

West Bengal Assembly Election Results:  ‘काली बनाम काबा’

भाजपा की तरफ से इस बार बंगाल चुनाव पर खास नजर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की थी। शाह ने लगभग 15 दिन तक यहां कैंप कर लगातार रैलियां, रोड शो और खूब सारी बैठकें कीं। उन्होंने पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ बैठकर बूथों को मजबूत, मध्यम और कमजोर श्रेणियों में बांटा, जिसमें खास फोकस उन मध्यम बूथों पर रहा, जहां पिछली बार जीत-हार का अंतर बेहद कम था। इसके साथ इस बार उत्तर प्रदेश की तरह बंगाल में भी भाजपा ने सफल ‘पन्ना प्रमुख’ मॉडल को लागू किया। साथ ही यह संदेश दिया गया कि मुख्यमंत्री बंगाल का ही होगा।
2011 से लगातार 15 साल की सत्ता के कारण पैदा हुई सत्ता विरोधी लहर और भ्रष्टाचार के आरोपों से निपटने के लिए भाजपा ने इस बार सीधे व्यक्तिगत हमले टीएमसी नेताओं पर करने बंद कर दिए। ममता बनर्जी की जगह पूरे सिस्टम और ‘सिंडिकेट राज’ को निशाने पर लिया गया।
मतलब इस चुनाव के बाद मतगणना से प्राप्त रुझानों और आंकड़ों ने साफ कर दिया कि पश्चिम बंगाल में भाजपा के लिए ये सारे फैक्टर काम कर गए और सबसे बड़ी बात ‘काली बनाम काबा’ का भाजपा का नैरेटिव ‘हृदय माछे काबा, नयन ए मदीना’ पर भारी पड़ गया।
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