Congress News: हालिया विधानसभा चुनावों के परिणाम आने के बाद राजनीतिक हलकों में बयानबाजी तेज हो गई है। विभिन्न राजनीतिक विश्लेषणों और दावों के आधार पर यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि कांग्रेस पार्टी के टिकट पर मुस्लिम उम्मीदवारों की जीत का अनुपात कई राज्यों में अपेक्षाकृत अधिक रहा है। इस मुद्दे को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक बहस भी देखने को मिल रही है।
कांग्रेस ने 19 सीटों पर जीत हासिल की
असम के चुनावी परिणामों को लेकर किए जा रहे दावों में कहा जा रहा है कि कांग्रेस ने कुल 19 सीटों पर जीत हासिल की, जिनमें से 18 विधायक मुस्लिम समुदाय से हैं। बताया जाता है कि पार्टी ने 20 मुस्लिम उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था, जिनमें से 18 उम्मीदवार चुनाव जीतने में सफल रहे। इसके विपरीत, 79 गैर-मुस्लिम उम्मीदवारों में से केवल एक ही उम्मीदवार जीत दर्ज कर सका। वहीं कांग्रेस की सहयोगी पार्टी रायजोर दल ने भी दो सीटों पर जीत हासिल की, जिनमें से एक सीट मुस्लिम उम्मीदवार के खाते में गई, जबकि दूसरी सीट पर अखिल गोगोई विजयी रहे, जिनका नाम एनआईए द्वारा माओवादी गतिविधियों से जुड़े मामलों की जांच के संदर्भ में पहले सामने आ चुका है।
Congress News: राजनीतिक दलों के बीच अलग-अलग मत
केरल के चुनावी परिदृश्य पर नजर डालें तो यहां 140 सदस्यीय विधानसभा में कुल 35 मुस्लिम विधायक चुने जाने की बात कही जा रही है। इनमें से लगभग 30 विधायक कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ गठबंधन से संबंधित बताए जाते हैं। कांग्रेस के अपने हिस्से में 8 मुस्लिम विधायक शामिल हैं, जबकि सहयोगी दल इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के सभी 22 विधायक मुस्लिम समुदाय से हैं। पश्चिम बंगाल में कांग्रेस के प्रदर्शन की बात करें तो यहां पार्टी ने 2 सीटों पर जीत दर्ज की, और दोनों ही मुस्लिम बहुल क्षेत्रों से आए उम्मीदवारों ने विजय हासिल की। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, कांग्रेस ने राज्य में कुल 63 मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिया था, जो तृणमूल कांग्रेस द्वारा उतारे गए 47 मुस्लिम उम्मीदवारों की तुलना में अधिक बताया जा रहा है।
तमिलनाडु में कांग्रेस ने 2 मुस्लिम उम्मीदवारों को चुनावी मैदान में उतारा था, जिनमें से एक उम्मीदवार चुनाव जीतने में सफल रहा। इन सभी आंकड़ों के आधार पर कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का यह भी दावा है कि केरल और असम में कांग्रेस तथा उसके सहयोगी दलों द्वारा उतारे गए मुस्लिम उम्मीदवारों की जीत का प्रतिशत 80 प्रतिशत से अधिक रहा है। इसी तर्क के आधार पर यह बहस भी तेज हो गई है कि कुछ क्षेत्रों में कांग्रेस टिकट पर मुस्लिम उम्मीदवारों की जीत की संभावना अपेक्षाकृत अधिक रही। हालांकि, इस पूरे मुद्दे पर राजनीतिक दलों के बीच अलग-अलग मत सामने आ रहे हैं। एक ओर जहां कुछ दल इसे प्रतिनिधित्व और सामाजिक संतुलन से जोड़कर देख रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ राजनीतिक समूह इसे चुनावी रणनीति और वोट बैंक की राजनीति के संदर्भ में व्याख्यायित कर रहे हैं। फिलहाल, यह मुद्दा राजनीतिक विमर्श का केंद्र बना हुआ है और विभिन्न पक्ष अपने-अपने दावों और विश्लेषणों के आधार पर इसे लेकर अपनी-अपनी व्याख्या पेश कर रहे हैं।
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