Home » Breaking News » असम चुनाव नतीजों ने चौंकाया! असम में कांग्रेस के 19 में 18 विधायकों की जीत पर क्यों मचा बवाल?

असम चुनाव नतीजों ने चौंकाया! असम में कांग्रेस के 19 में 18 विधायकों की जीत पर क्यों मचा बवाल?

Congress in Assembly Election: असम विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों के बाद एक दिलचस्प ट्रेंड सामने आया है, जिसने सियासी चर्चा को तेज कर दिया है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को राज्य में मिली 19 सीटों में से 18 पर मुस्लिम उम्मीदवारों की जीत ने पार्टी की सामाजिक और चुनावी रणनीति पर सवाल खड़े किए हैं।

असम में कांग्रेस का ‘मुस्लिम प्रतिनिधित्व’ ट्रेंड

जानकारी के मुताबिक, कांग्रेस ने असम में 20 मुस्लिम उम्मीदवार उतारे थे, जिनमें से 18 जीतने में सफल रहे। वहीं, गैर-मुस्लिम उम्मीदवारों में पार्टी का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा। यह आंकड़ा बताता है कि पार्टी का समर्थन आधार कुछ खास क्षेत्रों और समुदायों तक सीमित होता दिख रहा है।

Congress in Assembly Election: सहयोगी दलों का भी असर

कांग्रेस के सहयोगी रायजोर दल ने भी 2 सीटें जीतीं, जिनमें एक पर मुस्लिम उम्मीदवार विजयी रहा। इससे यह संकेत मिलता है कि विपक्षी वोटों का एक खास वर्ग में मजबूत ध्रुवीकरण देखने को मिला।

केरल और बंगाल में भी समान रुझान

केरल में 140 सीटों में से 35 मुस्लिम विधायक चुने गए, जिनमें बड़ी संख्या इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग और कांग्रेस गठबंधन से जुड़ी है। वहीं पश्चिम बंगाल में कांग्रेस को मिली दोनों सीटें मुस्लिम बहुल क्षेत्रों से आईं। तमिलनाडु में भी पार्टी ने सीमित सफलता हासिल की, जहां उसके एक मुस्लिम उम्मीदवार को जीत मिली।

Congress in Assembly Election: राहुल गांधी का ‘जनादेश की चोरी’ आरोप

इन नतीजों के बीच राहुल गांधी ने बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि असम और बंगाल में “जनादेश की चोरी” हुई है। उन्होंने दावा किया कि यह लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिश है और इसमें चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं।

ममता बनर्जी ने भी उठाए सवाल

वहीं ममता बनर्जी ने भी पश्चिम बंगाल में चुनाव परिणामों पर सवाल उठाते हुए सैकड़ों सीटों पर गड़बड़ी का आरोप लगाया। उनके दावे का समर्थन करते हुए राहुल गांधी ने भी चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए।

Congress in Assembly Election: बीजेपी की मजबूत बढ़त

दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी ने पश्चिम बंगाल में 206 से ज्यादा सीटें जीतकर पहली बार सरकार बनाने की स्थिति बनाई है, जबकि असम में भी उसने लगातार तीसरी बार सत्ता हासिल की है। चुनाव नतीजों ने सिर्फ राजनीतिक समीकरण ही नहीं बदले, बल्कि प्रतिनिधित्व, वोट बैंक और चुनावी पारदर्शिता जैसे मुद्दों पर नई बहस भी छेड़ दी है।

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