Uttarakhand News: उत्तराखंड के चंपावत में 16 वर्षीय नाबालिग से कथित गैंगरेप के मामले में बड़ा मोड़ सामने आया है। पुलिस के अनुसार, पीड़िता ने न्यायालय में बयान देकर कहा है कि उसके साथ कोई गलत घटना नहीं हुई और पूरा मामला एक साजिश का हिस्सा था। मामले में एसपी रेखा यादव ने बताया कि नाबालिग को कथित रूप से लालच देकर इस घटनाक्रम में शामिल किया गया। पुलिस के मुताबिक उसे आश्वासन दिया गया था कि उसके पिता का इलाज कराया जाएगा और आर्थिक मदद भी दी जाएगी।
पीड़िता के परिजनों ने जांच पर उठाए सवाल
पुलिस ने यह भी दावा किया है कि मेडिकल जांच, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और तकनीकी पड़ताल में गैंगरेप की पुष्टि नहीं हुई है। जिन लोगों पर आरोप लगाए गए थे, वे घटना के समय मौके पर मौजूद नहीं पाए गए। हालांकि, पुलिस के इस खुलासे से पहले पीड़िता के परिजनों ने जांच पर सवाल उठाए थे। पीड़िता के चचेरे भाई ने आरोप लगाया था कि पुलिस समझौते का दबाव बना रही है और आरोपियों को बचाने की कोशिश की जा रही है। परिवार ने यह भी दावा किया था कि केस शांत कराने के लिए 50 लाख रुपये तक का प्रस्ताव दिया गया।
Uttarakhand News: पुलिस जांच में क्या सामने आया
शादी समारोह में अपनी मर्जी से गई थी नाबालिग
एसआईटी जांच में सामने आया कि नाबालिग एक दोस्त के साथ अपनी इच्छा से शादी समारोह में गई थी। पुलिस ने स्थानीय लोगों से पूछताछ और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर घटनाक्रम की जांच की।
सीसीटीवी और CDR से ट्रेस हुई गतिविधियां
पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) के जरिए लड़की की लोकेशन और आवाजाही की पुष्टि की। जांच में सामने आया कि घटना वाले दिन वह कई अलग-अलग स्थानों पर गई थी।
मेडिकल रिपोर्ट में नहीं मिले संघर्ष के संकेत
पुलिस के अनुसार मेडिकल परीक्षण में शरीर पर किसी भी प्रकार की चोट, संघर्ष या जबरदस्ती के स्पष्ट संकेत नहीं पाए गए।

गवाहों के बयान और तकनीकी साक्ष्यों में विरोधाभास
एसआईटी को जांच के दौरान कुछ गवाहों के बयान तकनीकी साक्ष्यों और सीसीटीवी फुटेज से मेल नहीं खाते मिले, जिसके बाद मामले की दिशा बदल गई।
कमल रावत और पीड़िता के बीच लगातार संपर्क
जांच में यह भी सामने आया कि घटना वाले दिन कमल रावत, पीड़िता और उसकी महिला मित्र के बीच कई बार बातचीत हुई थी। पुलिस इसे जांच का अहम हिस्सा मान रही है।
नामजद आरोपी मौके पर मौजूद नहीं थे
मामले में पुलिस का कहना है कि जिन तीन लोगों विनोद सिंह रावत, नवीन सिंह रावत और पूरन सिंह रावत—पर आरोप लगाए गए थे, वे घटना के समय घटनास्थल पर नहीं थे। एसपी रेखा यादव के अनुसार, जांच में बदले की भावना से रची गई साजिश के संकेत मिले हैं। पुलिस का कहना है कि नाबालिग को बहला-फुसलाकर यह पूरा घटनाक्रम तैयार किया गया। पुलिस ने ये भी बताया कि मामले की फॉरेंसिक और डिजिटल जांच अभी जारी है। सभी संबंधित लोगों से पूछताछ की जा रही है। यदि आरोप झूठे या भ्रामक पाए गए तो कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।
जबकि पीड़िता के पिता ने अपनी शिकायत में बताया था कि वह बीमार हैं और इलाज के लिए उनकी बेटी उन्हें गांव से चंपावत लेकर आई थी। पिता के मुताबिक, उन्हें जानकारी मिली थी कि विनोद रावत बेटी को एक शादी समारोह में ले गया था। रात करीब 1:28 बजे बेटी के नंबर से कॉल आया, लेकिन कुछ सेकेंड बाद फोन कट गया और मोबाइल स्विच ऑफ हो गया। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि सुबह करीब 4 बजे उनकी बेटी एक कमरे में हाथ-पैर बंधी हुई मिली थी।
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