Chandranath Rath: सुवेंदु अधिकारी के निजी सहायक (PA) चंद्रनाथ रथ हमेशा उनके साथ हर बड़े राजनीतिक मोर्चे पर मौजूद रहे। चाहे भवानीपुर में ममता बनर्जी के खिलाफ चुनावी रणनीति हो, 2021 के नंदीग्राम चुनाव में ममता की हार का मामला हो या संदेशखाली केस हर जगह चंद्रनाथ रथ ने अहम भूमिका निभाई।
6 मई की रात को हुई दर्दनाक हत्या
42 साल के चंद्रनाथ रथ 6 मई की रात करीब 10:30 बजे अपने घर बारासात लौट रहे थे। वे एक स्कॉर्पियो कार में बैठे थे, जिसमें ड्राइवर और एक अन्य व्यक्ति भी मौजूद था। चंद्रनाथ आगे की सीट पर बैठे थे।

Chandranath Rath: रास्ता रोककर किया गया हमला
पुलिस के अनुसार रात लगभग 11 बजे, कोलकाता से करीब 20 किलोमीटर दूर उनकी गाड़ी को एक कार ने रोक लिया। इसके बाद पीछे से बाइक पर आए हमलावरों ने चंद्रनाथ रथ पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी। इस हमले में कुल 10 गोलियां चलाई गईं, जिनमें से चंद्रनाथ रथ को 3 गोलियां लगीं। इनमें 2 गोलियां उनके सीने के आर-पार हो गईं और 1 गोली पेट में लगी। इस हमले में कार में मौजूद ड्राइवर को भी गोली लग गई, जिससे वह भी घायल हो गया।
पुलिस का दावा: पहले से बनाई गई साजिश
पुलिस का कहना है कि यह कोई अचानक हुआ हमला नहीं था, बल्कि पूरी तरह से पहले से योजना बनाकर किया गया मर्डर है। मामले की जांच अब सीआईडी (CID) ने अपने हाथ में ले ली है और एक विशेष जांच टीम (SIT) बनाई गई है। अभी तक 3 लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।पुलिस के अनुसार हमलावर कई दिनों से चंद्रनाथ की गतिविधियों और उनके आने-जाने के रास्ते पर नजर रख रहे थे।
मां का बयान: चुनाव से पहले से मिल रही थी धमकी
चंद्रनाथ की मां ने बताया कि उन्हें चुनाव के समय से ही धमकियां मिल रही थीं। उन्होंने कहा कि उन्हें कहा गया था “4 तारीख के बाद तो दिल्ली में बैठे लोग भी नहीं बचा पाएंगे।”
मां का आरोप है कि जब से सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को हराया है, तभी से उनके परिवार पर खतरा बना हुआ था।उन्होंने यह भी कहा कि दोषियों को फांसी नहीं, लेकिन उम्रकैद की सजा जरूर मिलनी चाहिए।
Chandranath Rath: चुनाव और कानूनी मामलों में अहम भूमिका
BJP विधायक गुरवीर सिंह बराड़ के अनुसार, भवानीपुर चुनाव के दौरान चंद्रनाथ ही पूरी व्यवस्था संभालते थे। चाहे TMC के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो या कार्यकर्ताओं से जुड़े विवाद सब कुछ वे ही देखते थे।
वे यह भी बताते हैं कि अगर किसी कार्यकर्ता को परेशान किया जाता या प्रचार में बाधा आती, तो मामला चंद्रनाथ तक पहुंचता और वही पुलिस या चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराते थे।
EVM विवाद और चुनावी तनाव
30 अप्रैल और 1 मई की रात भवानीपुर के स्ट्रॉन्ग रूम में EVM टेंपरिंग के आरोप लगे थे। उस समय भी चंद्रनाथ वहीं मौजूद थे और पूरे मामले को संभाल रहे थे। उन्होंने चुनाव आयोग और सुरक्षा बलों के साथ समन्वय बनाया।BJP टीम के अनुसार, उस समय TMC के लोगों से लगातार तनाव और टकराव की स्थिति बनी हुई थी।

चुनाव मैनेजमेंट में अहम भूमिका
राजस्थान से आई बीजेपी टीम के सदस्य सुभाष नील बताते हैं कि चंद्रनाथ रथ को पहले ही दिन पूरी चुनावी व्यवस्था की जिम्मेदारी सौंप दी गई थी। वे लगातार बैठकों की व्यवस्था देखते थे, बूथ एजेंट तय करने का काम करते थे और रैलियों के रूट प्लान तैयार करते थे। इसके साथ ही वे प्रचार टीम की पूरी रणनीति बनाते थे और भोजन से लेकर सुरक्षा तक की सभी व्यवस्थाओं का ध्यान रखते थे। सुभाष नील के अनुसार, पूरे बंगाल में राजनीतिक तनाव के बीच भवानीपुर सीट सबसे ज्यादा संवेदनशील मानी जा रही थी, जिसे चंद्रनाथ रथ ने बेहद संगठित और प्रभावी तरीके से संभाला।
“कमांडो जैसी सतर्कता” में रहते थे चंद्रनाथ
एक राजनीतिक पदाधिकारी के अनुसार, चंद्रनाथ और सुवेंदु अधिकारी 2016 से साथ काम कर रहे थे। उस समय वे सरकारी कर्मचारी नहीं थे, बल्कि निजी सहायक की तरह हर जगह उनके साथ रहते थे।बाद में जब सुवेंदु अधिकारी BJP में शामिल हुए और नेता प्रतिपक्ष बने, तब चंद्रनाथ को सरकारी स्टाफ के रूप में जिम्मेदारी दी गई।
स्थानीय युवाओं की टीम और सुरक्षा व्यवस्था
BJP टीम का दावा है कि भवानीपुर में चंद्रनाथ ने स्थानीय युवाओं की छोटी-छोटी टीमें बनाई थीं, जो किसी भी विवाद या हमले की स्थिति में तुरंत मदद करती थीं। ये टीमें प्रचार के दौरान आसपास रहती थीं और स्थिति बिगड़ने पर सक्रिय हो जाती थीं।
चंद्रनाथ की हत्या के बाद उनकी मां ने कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था को मजबूत करना जरूरी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि नई सरकार दोषियों को सजा दिलाएगी और परिवार को न्याय मिलेगा।
जांच जारी, कई एंगल पर काम कर रही पुलिस
डीजीपी के अनुसार यह साफ है कि यह हमला एक संगठित साजिश के तहत किया गया है। पूरी टीम पहले से रेकी कर रही थी और रूट की जानकारी जुटाई गई थी। पुलिस ने संकेत दिया है कि जल्द ही मामले में और खुलासे हो सकते हैं।
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