Mother’s Day Special: आज पूरी दुनिया में मदर्स डे मनाया जा रहा है। मां बनना हर महिला के जीवन का एक बेहद खास और भावनात्मक अनुभव होता है। गर्भावस्था की दूसरी तिमाही को सबसे आरामदायक और ऊर्जा से भरपूर समय माना जाता है। इस दौरान शरीर में थकान कम हो जाती है, ऊर्जा बढ़ती है और हलचल भी पहले से ज्यादा महसूस होने लगती है। इसलिए इस समय को “ऊर्जा और मूवमेंट बढ़ने का चरण” भी कहा जाता है।

आयुष मंत्रालय की सलाह: योग से मिलेगी ताकत और संतुलन
भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए सलाह दी है कि इस अवधि में हल्के और सुरक्षित योगासन को अपनी दिनचर्या में जरूर शामिल करना चाहिए। इससे शरीर मजबूत होता है, लचीलापन बढ़ता है, शरीर का पोस्चर सुधरता है और मानसिक शांति भी मिलती है।
मंत्रालय के अनुसार दूसरी तिमाही वह समय है जब महिला अपनी बढ़ी हुई ऊर्जा का सही और सकारात्मक उपयोग कर सकती है। नियमित योग अभ्यास से न सिर्फ शारीरिक ताकत बढ़ती है, बल्कि शरीर को प्रसव के लिए भी तैयार किया जा सकता है।
ताड़ासन: पूरे शरीर की मजबूती के लिए
ताड़ासन खड़े होकर किया जाने वाला सरल योगासन है। इसमें दोनों पैरों को मिलाकर सीधे खड़ा होना होता है और हाथों को ऊपर की ओर उठाना होता है। इससे शरीर खिंचता है, रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है और शरीर का संतुलन बेहतर होता है।

वृक्षासन: संतुलन और एकाग्रता बढ़ाने के लिए
वृक्षासन में एक पैर पर खड़े होकर दूसरे पैर को घुटने के पास रखा जाता है और हाथों को ऊपर जोड़ते हैं। जरूरत पड़ने पर दीवार का सहारा भी लिया जा सकता है। यह योगासन शरीर का संतुलन और एकाग्रता बढ़ाने में मदद करता है।
सुखासन: मानसिक शांति के लिए
सुखासन में फर्श पर आराम से बैठकर पैरों को मोड़कर रखा जाता है। इसमें गहरी सांस लेने का अभ्यास किया जाता है। यह आसन मन को शांत करता है और कमर को आराम देता है।
शवासन: थकान दूर करने के लिए
शवासन में पीठ के बल लेटकर पूरे शरीर को पूरी तरह ढीला छोड़ दिया जाता है। दूसरी तिमाही में इसे साइड में तकिए के सहारे भी किया जा सकता है। यह शरीर की थकान दूर करता है और अच्छी नींद में मदद करता है।

शंखासन: हल्का व्यायाम पेट और कमर के लिए
शंखासन पेट और कमर की मांसपेशियों को हल्का व्यायाम देता है, जिससे शरीर को आराम और मजबूती दोनों मिलती है।
Mother’s Day Special: जरूरी सावधानियां
विशेषज्ञों के अनुसार इन सभी योगासनों को धीरे-धीरे और आराम से करना चाहिए। अगर किसी भी तरह का दर्द या असुविधा महसूस हो तो तुरंत अभ्यास रोक देना चाहिए। योग शुरू करने से पहले डॉक्टर या योग विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहद जरूरी है।
दूसरी तिमाही में किया गया सही योग न केवल मां की सेहत को बेहतर बनाता है, बल्कि आने वाले बच्चे के लिए भी एक स्वस्थ और सकारात्मक वातावरण तैयार करता है।
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