‘सीआईआई एनुअल बिजनेस समिट 2026’ में बोलते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण पैदा हुए ऊर्जा संकट ने भारतीय तेल कंपनियों पर भारी दबाव डाला है।
कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार
अमेरिका-ईरान तनाव और आपूर्ति में रुकावट की आशंकाओं के चलते वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। इससे तेल कंपनियों पर दबाव और बढ़ गया है।
Mumbai: वित्त वर्ष 2026 का मुनाफा खत्म होने की आशंका
चर्चा के दौरान दिए गए इंडस्ट्री अनुमान के मुताबिक, सरकारी तेल कंपनियां — इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम — वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में मिलाकर करीब 1.2 लाख करोड़ रुपए का नुकसान दर्ज कर सकती हैं।
यह अनुमान पहले के बाजार अनुमान से काफी ज्यादा है। पहले माना जा रहा था कि अगर कच्चा तेल 120 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहेगा, तो कंपनियों को हर महीने करीब 27,000 करोड़ रुपए यानी एक तिमाही में लगभग 81,000 करोड़ रुपए का नुकसान होगा।
हालांकि अभी तक कच्चे तेल की कीमतें ज्यादातर समय 115 डॉलर प्रति बैरल से नीचे रही हैं, लेकिन वास्तविक नुकसान का अनुमान पहले के आंकड़ों से ज्यादा निकल रहा है।
Mumbai: ईंधन सुरक्षा और सप्लाई को लेकर चिंता
उन्होंने कहा कि सरकार ने सप्लाई में किसी भी संभावित रुकावट से निपटने के लिए एलपीजी उत्पादन बढ़ा दिया है।मंत्री ने आगे कहा कि देश में रोजाना एलपीजी उत्पादन को पहले के 35,000-36,000 टन से बढ़ाकर करीब 54,000 टन कर दिया गया है।








