Delhi Police: दिल्ली पुलिस की द्वारका एंटी नारकोटिक्स सेल के प्रभारी रहे इंस्पेक्टर सुभाष यादव की गिरफ्तारी के बाद मामले ने बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक मोड़ ले लिया है। रिश्वतकांड की जांच कर रही CBI को अब तक 100 करोड़ रुपये से अधिक के संदिग्ध लेन-देन के सुराग मिले हैं। इसके साथ ही द्वारका एक्सप्रेसवे और नीमराणा में करोड़ों की संपत्तियों का भी खुलासा हुआ है।
रिमांड पर लेकर पूछताछ की तैयारी
सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसी अब सुभाष यादव को रिमांड पर लेकर पूछताछ की तैयारी कर रही है। इस दौरान उन वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है, जिन पर इंस्पेक्टर को संरक्षण देने के आरोप लग रहे हैं। बताया जा रहा है कि मामले से जुड़ी रिपोर्ट प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) तक भेजी जा चुकी है। जांच में सामने आया है कि पिछले वर्ष इंस्पेक्टर सुभाष यादव का तबादला द्वारका से दक्षिण जिले में कर दिया गया था। हालांकि तत्कालीन पुलिस आयुक्त के आदेश के बावजूद वह तुरंत रिलीव नहीं हुआ। बाद में एक उपायुक्त स्तर के अधिकारी ने उसे दक्षिण जिले में जॉइन करवाया, लेकिन महज तीन महीने के भीतर उसने फिर से द्वारका वापसी कर ली और दोबारा नारकोटिक्स सेल का प्रभारी बन गया।
सूत्रों का दावा है कि सुभाष यादव की दिल्ली पुलिस के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों से करीबी थी, जिसकी वजह से उसे लगातार अहम पोस्टिंग मिलती रही। दिल्ली पुलिस के सूत्रों के अनुसार, उत्तम नगर, नवादा, डाबड़ी और द्वारका इलाके में बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक, खासकर नाइजीरियाई मूल के लोग रहते हैं। इनमें से कई पर ड्रग्स तस्करी में शामिल होने के आरोप रहे हैं। जांच एजेंसियों को शक है कि इंस्पेक्टर सुभाष यादव रिश्वत लेकर ड्रग्स मामलों में आरोपियों को राहत देता था। यही कारण है कि अब उसके पुराने मामलों और संपर्कों की भी जांच की जा रही है।
Delhi Police: अंधेरे का फायदा उठाकर फरार
CBI अधिकारियों के अनुसार, 21 अप्रैल को कार्रवाई के दौरान हवलदार अजय को दो लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया था। उसी दौरान इंस्पेक्टर के कार्यालय से करीब 48.87 लाख रुपये नकद भी बरामद हुए थे। हालांकि, कार्रवाई के बीच अचानक कार्यालय की बिजली काट दिए जाने से अफरा-तफरी मच गई और अंधेरे का फायदा उठाकर इंस्पेक्टर सुभाष यादव वहां से फरार हो गया था। बाद में उसे गिरफ्तार किया गया।
तीन IPS अधिकारी जांच के दायरे में
सूत्रों के अनुसार, CBI अब उन तीन IPS अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कर सकती है जिनके नाम सुभाष यादव को संरक्षण देने की चर्चाओं में सामने आ रहे हैं। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या पोस्टिंग, ट्रांसफर और कार्रवाई से बचाने में किसी वरिष्ठ स्तर की मदद मिली थी। यह मामला अब केवल रिश्वतखोरी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि दिल्ली पुलिस के भीतर संभावित भ्रष्ट नेटवर्क की जांच तक पहुंच चुका है।
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