NEET Protest: CM विजय: देश में NEET परीक्षा के पेपर लीक को लेकर विवाद चल रहा है। इसी बीच तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने केंद्र सरकार से NEET परीक्षा को बंद करने की मांग की है। सीएम विजय ने कहा कि मेडिकल कॉलेज में एडमिशन 12वीं के नंबरों के आधार पर होना चाहिए। उनका कहना है कि MBBS, BDS और AYUSH जैसे कोर्स में दाखिला देने का फैसला राज्यों को करने देना चाहिए।
‘मुख्यमंत्री विजय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ‘बार-बार हो रहे पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने की घटनाएं यह साबित करती हैं कि राष्ट्रीय स्तर की यह परीक्षा संरचनात्मक खामियों से ग्रस्त है।’
पेपर लीक मामले पर सीएम विजय का बयान- “यह पहली बार नहीं”
विजय ने कहा कि NEET परीक्षा पर पहले भी कई बार सवाल उठ चुके हैं। उन्होंने 2024 के पेपर लीक मामले का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय छह राज्यों में FIR दर्ज हुई थीं और जांच CBI को सौंपी गई थी। उन्होंने बताया कि बाद में इसरो के पूर्व अध्यक्ष डॉ. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ समिति बनाई गई थी। इस समिति ने परीक्षा में सुधार के लिए 95 सुझाव दिए थे।
विजय ने कहा कि इतने सुझावों के बाद भी दो साल के अंदर फिर पेपर लीक हो गया और परीक्षा रद्द करनी पड़ी। उनके मुताबिक, यह दिखाता है कि राष्ट्रीय स्तर की इस परीक्षा व्यवस्था में बड़ी कमियां हैं।
Statement by the Honorable Chief Minister of Tamil Nadu, Thiru. C. Joseph Vijay, urging the Union Government to cancel the NEET based admissions in medical courses and to permit the respective States to fill up seats based on Class 12 marks.
1/2— CMOTamilNadu (@CMOTamilnadu) May 13, 2026
तमिलनाडु लगातार कर रहा NEET परीक्षा का विरोध
तमिलनाडु शुरू से ही NEET परीक्षा का विरोध करता रहा है। राज्य सरकार का कहना है कि यह परीक्षा ग्रामीण और गरीब परिवारों के छात्रों के लिए नुकसानदायक है। उनका मानना है कि NEET से शहरों और अमीर परिवारों के बच्चों को ज्यादा फायदा मिलता है। सरकार का कहना है कि अंग्रेजी माध्यम और महंगी कोचिंग लेने वाले छात्रों को इस परीक्षा में बढ़त मिलती है। वहीं गांवों, सरकारी स्कूलों और क्षेत्रीय भाषा में पढ़ने वाले कई प्रतिभाशाली छात्र पीछे रह जाते हैं।
राज्य लंबे समय से केंद्र सरकार से NEET से छूट की मांग कर रहा है। मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि NEET लागू होने के बाद ग्रामीण और तमिल माध्यम के students पर बुरा असर पड़ा है। सरकारी स्कूलों के छात्रों की मेडिकल सीटों तक पहुंच कम हुई है और गरीब परिवारों के लिए मेडिकल पढ़ाई और मुश्किल हो गई है।विजय ने कहा, “तमिलनाडु सरकार फिर से अपनी पुरानी मांग दोहराती है कि NEET परीक्षा को खत्म किया जाए।”
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மருத்துவப் படிப்புகளில் நீட் (NEET) அடிப்படையிலான சேர்க்கைகளை ரத்து செய்யவும், பன்னிரெண்டாம் வகுப்பு மதிப்பெண்களின் அடிப்படையில் மாநிலங்களே நிரப்ப அனுமதிக்க, ஒன்றிய அரசை வலியுறுத்தி மாண்புமிகு தமிழ்நாடு முதலமைச்சர் திரு.ச.ஜோசப் விஜய் அவர்களின் அறிக்கை#CMJosephVijay pic.twitter.com/R1G6on3Scy
— CMOTamilNadu (@CMOTamilnadu) May 13, 2026
NEET Protest: 12वीं के अंकों से एडमिशन की मांग
विजय ने केंद्र सरकार से मांग करते हुए कहा, ‘तमिलनाडु सरकार राज्य की उस पुरानी मांग को फिर से दोहराती है, जिसमें NEET को खत्म करने और राज्यों को 12वीं कक्षा के अंकों के आधार पर MBBS, BDS और AYUSH पाठ्यक्रमों में राज्य कोटे के तहत सभी सीटें भरने की अनुमति दी जाए।’
हाल ही में हुए पेपर लीक विवाद के बाद NEET फिर से देश की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन गया है। विपक्षी दल परीक्षा की पारदर्शिता और सुरक्षा को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं।
तमिलनाडु में यह मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक और भावनात्मक रूप से जुड़ा रहा है। राज्य के कई छात्र संगठन और राजनीतिक दलों का कहना है कि NEET सामाजिक समानता के खिलाफ है और इससे गरीब व ग्रामीण छात्रों को नुकसान होता है।
NEET परीक्षा पर क्या है केंद्र सरकार का रुख?
केंद्र सरकार और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (National Medical Commission) अब तक NEET परीक्षा का समर्थन करते रहे हैं। उनका कहना है कि देशभर में मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन की प्रक्रिया को एक समान बनाने के लिए NEET जरूरी है।
केंद्र का मानना है कि इस परीक्षा से पारदर्शिता बढ़ी है और अलग-अलग राज्यों व निजी कॉलेजों में होने वाली गड़बड़ियों पर रोक लगी है। हालांकि, बार-बार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों के बाद परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल भी उठने लगे हैं।
Written by- Rishika Srivastva








