Dharmendra Pradhan NEET: शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan ने शुक्रवार को बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि अगले सत्र से NEET-UG परीक्षा ऑनलाइन मोड में कराई जाएगी। केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने यह भी स्वीकार किया कि 3 मई को आयोजित NEET-UG 2026 परीक्षा का पेपर लीक हुआ था।
उन्होंने कहा कि सरकार नहीं चाहती थी कि किसी गलत उम्मीदवार का चयन हो, इसलिए जिम्मेदारी के साथ परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया गया। अब NEET-UG का री-एग्जाम 21 जून को आयोजित होगा।
7 मई को मिली थी गड़बड़ी की जानकारी
धर्मेंद्र प्रधान ने बताया कि 7 मई को परीक्षा में गड़बड़ी की सूचना मिली थी। इसके बाद National Testing Agency (NTA) ने सरकार को जानकारी दी और 12 मई को दोबारा परीक्षा कराने का फैसला लिया गया। उन्होंने कहा कि री-एग्जाम में छात्रों को 15 मिनट अतिरिक्त समय दिया जाएगा और अभ्यर्थी अपनी पसंद का परीक्षा केंद्र भी चुन सकेंगे। 3 मई को हुई परीक्षा देश के 551 और विदेशों के 14 शहरों में आयोजित की गई थी। इसके लिए 5400 से अधिक परीक्षा केंद्र बनाए गए थे।
Dharmendra Pradhan NEET: छात्रों के परिवहन के लिए राज्यों से होगी बात
शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि दोबारा परीक्षा में किसी प्रकार की अनियमितता न हो।उन्होंने कहा, “एक मंत्री और अभिभावक के रूप में परीक्षा रद्द करना कठिन फैसला था, लेकिन यह जरूरी था।” प्रधान ने बताया कि अभ्यर्थियों के आने-जाने की सुविधा सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकारों से बातचीत की जाएगी।
Dharmendra Pradhan NEET: NEET पेपर लीक मामले में अब तक 7 गिरफ्तार
Central Bureau of Investigation (CBI) ने पेपर लीक मामले में अब तक 7 लोगों को गिरफ्तार किया है।गिरफ्तार आरोपियों में राजस्थान के मांगी लाल बिंवाल, दिनेश बिंवाल, विकास बिंवाल, हरियाणा के यश यादव और नासिक के शुभम खैरनार शामिल हैं। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने पांचों को 7 दिन की CBI कस्टडी में भेज दिया है। इसके अलावा पुणे की ब्यूटीशियन मनीषा वाघमारे और नासिक के धनंजय लोखंडे को भी गिरफ्तार किया गया है। लोखंडे को कोर्ट ने 6 दिन की CBI कस्टडी में भेजा है।
तीन दिनों में तेजी से बढ़ी जांच
12 मई को NTA ने NEET-UG 2026 परीक्षा रद्द की और मामले की जांच CBI को सौंप दी गई। 13 मई को CBI ने राजस्थान, बिहार समेत कई राज्यों में छापेमारी की। जांच में सामने आया कि कथित तौर पर पेपर राजस्थान के सीकर तक पहुंचाया गया था। इसी दिन Federation of All India Medical Association (FAIMA) ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर परीक्षा सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में दोबारा कराने की मांग की। 14 मई को गिरफ्तार आरोपियों को दिल्ली की अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें CBI हिरासत में भेज दिया गया।








