RG Kar Medical: पश्चिम बंगाल के चर्चित आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल मामले की जांच में तेजी आने के बाद एक बार फिर राज्य की पूर्व सरकार और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े होने लगे हैं। जूनियर महिला डॉक्टर के साथ दुष्कर्म और हत्या की घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था। अब मामले में सामने आ रहे नए घटनाक्रमों ने तत्कालीन मुख्यमंत्री Mamata Banerjee के कार्यकाल के दौरान प्रशासनिक जवाबदेही और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बहस तेज कर दी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच एजेंसियां अब अस्पताल प्रशासन, पुलिस कार्रवाई और उस समय की सरकारी कार्यप्रणाली की गहराई से जांच कर रही हैं।
प्रशासनिक लापरवाही पर उठे सवाल
जांच के दौरान तीन वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के निलंबन और अस्पताल के पूर्व अधीक्षक संदीप घोष से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच ने मामले को और गंभीर बना दिया है। घटना के समय राज्य में गृह और स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी भी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के पास थी। ऐसे में विपक्ष और कई सामाजिक संगठनों ने प्रशासनिक विफलताओं को लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। आरोप है कि सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर खामियां थीं और समय रहते उचित कार्रवाई नहीं की गई।
RG Kar Medical: महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता
यह मामला केवल एक आपराधिक घटना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सार्वजनिक संस्थानों में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी बड़ा सवाल बन गया। मेडिकल कॉलेज जैसे सुरक्षित माने जाने वाले परिसर में हुई इस घटना ने सुरक्षा प्रबंधन की कमियों को उजागर कर दिया। घटना के बाद नागरिक संगठनों और डॉक्टर समुदाय में भारी आक्रोश देखने को मिला। पीड़िता के परिवार ने भी लगातार निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। मामले में प्रशासन की शुरुआती कार्रवाई को लेकर भी आलोचना हुई और बाद में उच्च न्यायालय के निर्देश पर केंद्रीय जांच एजेंसी को जांच सौंपी गई।
चुनाव परिणामों में भी दिखा असर
हालिया विधानसभा चुनाव परिणामों में भी इस मामले का असर देखने को मिला। काशीपुर-बेलगछिया और पानीहाटी सीटों पर तृणमूल कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा। विशेष रूप से पानीहाटी सीट पर पीड़िता की मां की जीत ने इस मुद्दे को राजनीतिक रूप से और अधिक चर्चा में ला दिया। भारतीय जनता पार्टी ने चुनाव के दौरान इस मामले को प्रमुख मुद्दा बनाया था और नई सरकार बनने के बाद जांच तेज करने का दावा किया। अब जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, प्रशासनिक जवाबदेही, महिलाओं की सुरक्षा और सरकारी कार्यप्रणाली को लेकर बहस और तेज होती जा रही है।
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