Braj 84 kosi parikrama: राजस्थान के डीग जिले की पवित्र ब्रज भूमि में एक बार फिर श्रद्धा और भक्ति का विशाल संगम देखने को मिल रहा है। अधिक मास के शुभ अवसर पर विश्व प्रसिद्ध ब्रज 84 कोसी परिक्रमा की शुरुआत हो चुकी है। इस पवित्र यात्रा में देश के अलग-अलग राज्यों से हजारों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। यह परिक्रमा केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं मानी जाती, बल्कि सदियों से चली आ रही परंपरा, गहरी आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक भी है।
भगवान श्रीकृष्ण की पावन भूमि
ब्रज क्षेत्र को भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं की धरती माना जाता है। यहां के मंदिर, सरोवर, कुंज और पवित्र धूल आज भी भक्तों को कृष्ण काल की दिव्य अनुभूति कराते हैं। यही कारण है कि अधिक मास के दौरान ब्रज में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है और पूरा क्षेत्र भक्ति और श्रद्धा के रंग में रंग जाता है।
करीब 268 किलोमीटर लंबी यह 84 कोसी परिक्रमा मथुरा, वृंदावन, गोवर्धन, बरसाना और नंदगांव जैसे कई प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों से होकर गुजरती है। श्रद्धालु पैदल यात्रा करते हुए इन पवित्र स्थानों के दर्शन करते हैं और अपनी आस्था व्यक्त करते हैं।

अधिक मास का विशेष महत्व
हिंदू धर्म में अधिक मास को बहुत ही शुभ और पवित्र माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस महीने में किए गए पूजा-पाठ, व्रत, दान और परिक्रमा का फल कई गुना अधिक प्राप्त होता है। इसी वजह से हर बार अधिक मास आने पर बड़ी संख्या में भक्त ब्रज पहुंचकर इस पवित्र परिक्रमा में शामिल होते हैं।
Braj 84 kosi parikrama: भक्ति से गूंज उठा ब्रज
परिक्रमा के दौरान पूरे ब्रज क्षेत्र में भजन-कीर्तन, कथा और सत्संग का आयोजन हो रहा है। श्रद्धालु पूरी श्रद्धा के साथ धार्मिक कार्यक्रमों में भाग ले रहे हैं, जिससे वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना हुआ है। जगह-जगह भंडारे और सेवा शिविर लगाए गए हैं, जहां यात्रियों के लिए भोजन, पानी और आराम की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्थाएं
परिक्रमा को देखते हुए प्रशासन ने भी व्यापक तैयारियां की हैं। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया है और चिकित्सा सुविधाओं के साथ यातायात प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। अधिकारियों का प्रयास है कि श्रद्धालुओं को यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
ब्रज 84 कोसी परिक्रमा को केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि आत्मिक शांति और भगवान से जुड़ने का विशेष माध्यम माना जाता है। डीग की पावन धरती पर शुरू हुई यह यात्रा श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभव के साथ गहरी श्रद्धा और मन की शांति का एहसास करा रही है।
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