Iran Israel: मिडिल ईस्ट में एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। इजराइली खुफिया एजेंसियों ने दावा किया है कि इरान मिसाइल और ड्रोन के जरिए बड़े हमले की तैयारी कर रहा है। बताया जा रहा है कि अमेरिका और इरान के बीच चल रही बातचीत के विफल होने के बाद तेहरान आक्रामक रुख अपना सकता है। इस दावे के बाद पूरे क्षेत्र में सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है।
इजराइल ने जताई बड़े हमले की आशंका
इजराइली सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि इरान पहले हमला करके रणनीतिक बढ़त हासिल करना चाहता है। अधिकारियों के अनुसार इजराइल और अमेरिका के बीच इरान को लेकर रणनीति पर पूरी सहमति नहीं बन पाई है। इसी स्थिति का फायदा उठाने की कोशिश इरान कर सकता है। खुफिया एजेंसियों का दावा है कि इरान मिसाइल और ड्रोन के जरिए अचानक हमला कर सकता है। इजराइल का मानना है कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो हालात और गंभीर हो सकते हैं।
Iran Israel: खाड़ी देशों पर भी मंडरा रहा खतरा
संभावित हमले को लेकर सिर्फ इजराइल ही नहीं बल्कि खाड़ी देशों में भी चिंता बढ़ गई है। सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और कतर जैसे देशों को भी खतरे की जद में माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इरान यदि हमला करता है तो उसका उद्देश्य पूरे क्षेत्र में अस्थिरता पैदा करना हो सकता है। तेल उत्पादन और व्यापार के लिहाज से अहम माने जाने वाले इन देशों पर किसी भी हमले का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
अमेरिका-इरान वार्ता पर बढ़ी अनिश्चितता
कुछ समय से अमेरिका और इरान के बीच तनाव कम करने को लेकर बातचीत चल रही थी, लेकिन अब तक कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया है। अमेरिकी प्रशासन ने इरान पर कई शर्तें रखीं, जिन्हें तेहरान ने स्वीकार नहीं किया। इजराइल का मानना है कि कूटनीतिक रास्ता लगभग बंद हो चुका है। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियां सैन्य विकल्पों पर भी विचार कर रही हैं। इजराइल के भीतर इस बात पर चर्चा तेज हो गई है कि क्या संभावित खतरे को रोकने के लिए पहले कार्रवाई की जाए।
Iran Israel: दुनिया की नजर मिडिल ईस्ट पर
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव पर अमेरिका, यूरोप और कई अन्य देश लगातार नजर बनाए हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र समेत कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने शांति बनाए रखने की अपील की है। हालांकि, क्षेत्र में जिस तेजी से सैन्य गतिविधियां बढ़ रही हैं, उससे बड़े संघर्ष की आशंका भी जताई जा रही है। यदि हालात और बिगड़ते हैं तो इसका असर पूरी दुनिया की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।








