Washington News: वाशिंगटन ने गत शुक्रवार अपनी एक नौका को गहरे समुद्र की खुदाई के लिए भेजा है। अब यह अभियान अमेरिका की समुद्र तल पर अपना हक जमाने की पहल है। जिस तरह से ट्रंप ग्रीन लैंड को हथियाने की कोशिश कर रहा था, वैसे ही अब वह समुद्री तल से खनिजों के खनन के लिए चल पड़ा है। यूएन ने अंतर्राष्ट्रीय समुद्री तल प्राधिकरण की देख-रेख का जिम्मा लिया हुआ है। इस भाग पर किसी एक देश का अधिकार नहीं है। हां, यह जरूर है कि समुद्र का क्षेत्र जिस देश के करीब है, उसका एक निश्चित सीमा तक ही अधिकार संबद्ध देश को दिया हुआ है।
यूएन ने हाई सी ट्रीटी यानी संधि के माध्यम से कुछ समुद्र के हिस्से को दिया है, ताकि उसकी जैव विविधा का वह संरक्षण करता रहे। 12 नाटिकल माइल्स तक ही संबद्ध देश को अधिकार दिया हुआ है और संपूर्ण आर्थिक जोन के हिसाब से 200 नौटिकल माइल्स तक कोई भी देश अपने समुद्र के तट पर व्यवसाय कर सकता है। सभी देशों को अपने करीबी समुद्री भाग के तटीय और भूमि से जुड़े हिस्से में समान अधिकार प्राप्त है जिसमें नेविगेशन, हवा में उड़ान भरने और सब मैरीन केबल बिछाना शामिल है।
समुद्र पर एक का अधिकार नहीं
सबसे विशेष बात यह है कि कोई भी देश संपूर्ण समुद्र और उसकी तलहटी पर अपना अधिकार नहीं जमा सकता है, वह किसी देश विशेष की संप्रभुता नहीं है। वह सब आरक्षित है शांति और सभी देशों के लाभ के लिए। अतंर्राष्ट्रीय सी बेड आथरिटी (आईसीए) ने ट्रंप के इस कार्य को अवैधानिक करार दिया है। सारा समुद्र किसी देश की सीमा को नहीं खींचता है। सभी देश इनसे आवागमन कर सकते हैं, पर किसी एक का अधिकार नहीं है। और न कोई देश ट्रंप की तरह पूरे समुद्र की तलहटी में माइनिंग कर सकता है। इसके लिए ऐसा कोई नियम नहीं है। उसकी वजह यह है कि समुद्र में भी जीवजतंुओं का समूह रहता है, उनकी भी अपनी जैव विभिन्नताएं हैं। उस जैविक पारिस्थितिकी से छेड़छाड़ करना यही संकेत देता है कि आप समुद्र के उस जैविक संसार को उजाड़ने का उपक्रम कर रहे हैं, जो आपको भी एक दिन उजाड़ देगा। जल और स्थल के जैविक संतुलन को बिगाड़ना यही संकेत देता है कि आप सीमित सुविधाओं को पाने के लिए अपने सारे सराउंडिंग यानि आसपास के वातावरण को समाप्त करने पर तुले हैं।
Washington News: समुद्र अज्ञात क्षेत्र
समुद्र का गहरा तल सिर्फ 25 प्रतिशत ही नापा गया है। और लाखों जीव जंतुओं की प्रजाति में से सिर्फ 5 हजार को ही ढूंढ़ पाये हैं। ऐसी स्थिति में माइनिंग कंपनियां अपनी आंखें गड़ाए हुए है। समुद्र के नीचे यह चट्टाने 13 हजार फुट पर हैं। जिनमें खरबों डालर का व्यवसाय छिपा हुआ है।
लेखक: भगवती प्रसाद डोभाल
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