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स्मार्ट दिल्ली की दिशा में बड़ा कदम, दिल्ली के सभी रजिस्ट्रार ऑफिस को हाईटेक बनाने की तैयारी में रेखा सरकार

स्मार्ट दिल्ली की दिशा में बड़ा कदम

Delhi News: दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता राजधानी की संपत्ति पंजीकरण व्यवस्था में व्यापक बदलाव लाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही हैं। मुख्यमंत्री चाहती हैं कि राजधानी के सब-रजिस्ट्रार ऑफिसों की कार्य संस्कृति बदले और वहां प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री कराने आने वाले लोगों को किसी प्रकार की परेशानी, भ्रष्टाचार, दलाल संस्कृति या अनावश्यक देरी का सामना न करना पड़े।

क्या है सरकार का उद्देश्य?

सरकार का उद्देश्य राजधानी के रजिस्ट्रार कार्यालयों को आधुनिक, पारदर्शी, तकनीक आधारित और नागरिक-अनुकूल सेवा केंद्रों के रूप में विकसित करना है, ठीक उसी प्रकार जैसे देश में पासपोर्ट सेवा केंद्रों के माध्यम से व्यवस्थित और समयबद्ध सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। मुख्यमंत्री का यह भी कहना है कि इस योजना के अंतर्गत दिल्ली सरकार देश की सबसे बेहतर व्यवस्था बनाएगी। इस महत्वपूर्ण योजना को चरितार्थ करने के लिए मुख्यमंत्री ने हाल ही में संबंधित विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक विशेष बैठक आयोजित की थी। बैठक में कुछ कंपनियों ने प्रेजेंटेशन भी पेश किए थे। इसमें जानकारी दी गई थी कि कुछ राज्यों में तकनीक आधारित व्यवस्था, प्रशिक्षित स्टाफ और एकीकृत डिजिटल सेवाओं के जरिए नागरिकों को तेज, पारदर्शी और परेशानी-मुक्त नागरिक सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं। इस मसले पर मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों के साथ कई बार विचार-विमर्श किया, जिसके बाद यह निर्णय लिया गया कि दिल्ली सरकार को भी ऐसे ही रजिस्ट्रार कार्यालय विकसित करने चाहिएं, जहां लोगों को अर्थपूर्ण सेवाएं मिलें और सरकार का राजस्व भी बढ़े।

नागरिकों को मिले समयबद्ध सेवाएं 

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि राजधानी के सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों में आने वाले नागरिकों को सम्मानजनक, पारदर्शी और समयबद्ध सेवाएं मिलनी चाहिए। इसी उद्देश्य से सरकार ऐसे मॉडल पर काम कर रही है, जिसमें लंबी कतारों, अव्यवस्था, तकनीकी बाधाओं और अनावश्यक हस्तक्षेप को समाप्त किया जा सके। प्रस्तावित मॉडल के तहत रजिस्ट्रार कार्यालयों में नागरिकों को एयरपोर्ट और पासपोर्ट सेवा केंद्रों जैसी आधुनिक सुविधाएं और प्रोफेशनल सेवा अनुभव उपलब्ध कराने की योजना है। मुख्यमंत्री के अनुसार, इन मॉडल केंद्रों में वातानुकूलित प्रतीक्षालय, हेल्प डेस्क, डिजिटल सहायता केंद्र, प्रशिक्षित स्टाफ, पेयजल, स्वच्छ शौचालय, स्मार्ट टोकन प्रणाली और रियल टाइम एप्लीकेशन ट्रैकिंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि लोगों को रजिस्ट्री से जुड़े कार्यों के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें और अधिकतर प्रक्रियाएं तकनीक आधारित एवं व्यवस्थित तरीके से पूरी हों। मुख्यमंत्री के अनुसार इन आधुनिक ऑफिसों का लुक शानदार होगा और वहां आधुनिक हार्डवेयर और नवीनतम अपडेट से सॉफ्टवेयर सिस्टम का इस्तेमाल किया जाएगा।

Delhi News: आधुनिक तकनीकों का उपयोग

वहां ऑनलाइन अपॉइंटमेंट, प्री-चेक सेवाएं, लाइव एप्लीकेशन ट्रैकिंग और स्मार्ट टोकन सिस्टम के माध्यम से लोगों का इंतजार समय कम करने और पूरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने पर भी जोर दिया गया है। मुख्यमंत्री के अनुसार भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अत्याधुनिक तकनीक आधारित सुरक्षा और सत्यापन तंत्र पर विशेष फोकस किया गया है। साथ ही एआई आधारित फेस रिकग्निशन तकनीक के माध्यम से आवेदकों की पहचान सुनिश्चित करने, बैकग्राउंड सत्यापन तथा ब्लॉकचेन आधारित रिकॉर्ड सुरक्षा लागू करने की व्यवस्था भी की जाएगी। नई व्यवस्था में संपत्ति दस्तावेजों को छेड़छाड़-मुक्त बनाने, फर्जीवाड़े को रोकने तथा विवादों को कम करने के लिए डिजिटल रिकॉर्ड प्रबंधन, जियो-फेंसिंग और सुरक्षित डेटा इंटीग्रेशन जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। निजी भागीदारों की सहायता से नए प्रीमियम मॉडल रजिस्ट्रार केंद्र का वैधानिक अधिकार और अंतिम निर्णय लेने की शक्तियां पूरी तरह सरकारी अधिकारियों के पास ही रहेंगी। मुख्यमंत्री ने यह भी जानकारी दी कि इन आधुनिक कार्यालयों के लिए पारदर्शी प्रक्रिया से स्थापित व अनुभवी कंपनियों का चयन किया जाएगा।

एक लाभ यह भी रहेगा कि मौजूदा सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों पर भीड़ कम होने से सरकारी अधिकारी मुख्य प्रशासनिक कार्यों पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकेंगे। नए कार्यालयों के परिचालन से वहां दलालों और बिचौलियों से मुक्ति मिलेगी, साथ ही राजस्व की चोरी, संपत्तियों के गलत मूल्यांकन, लंबित दस्तावेजों की ट्रैकिंग में कठिनाई तथा फर्जी दस्तावेजों के जोखिम का खतरा खत्म हो जाएगा। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का स्पष्ट मानना है कि नागरिकों को सरकारी सेवाएं प्राप्त करने के लिए किसी प्रकार की अनावश्यक परेशानी या बिचौलियों पर निर्भर नहीं होना चाहिए। इसी कारण सरकार ऐसे मॉडल पर काम कर रही है, जिसमें मानव हस्तक्षेप को कम करते हुए अधिकतम प्रक्रियाओं को डिजिटल और ट्रैकिंग आधारित बनाया जा सके।

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