Gymkhana Club Dispute: लुटियंस दिल्ली स्थित जिमखाना क्लब को खाली कराने के केंद्र सरकार के आदेश पर मंगलवार को दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने फिलहाल सरकार के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, लेकिन केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर 8 हफ्ते में जवाब दाखिल करने को कहा है। मामले की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल की दलीलों पर हाईकोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए पूछा, “आपके याचिकाकर्ता को बाहर किया जा चुका है… आप सदस्य की हैसियत से यहां कैसे आ सकते हैं?”
कोर्ट में क्या हुआ
मंगलवार को हाईकोर्ट में इस मामले से जुड़ी तीन याचिकाओं पर सुनवाई हुई। इनमें एक क्लब सदस्य विजय खुराना, दूसरी क्लब स्टाफ वेलफेयर एसोसिएशन और तीसरी दिल्ली जिमखाना क्लब की पूर्व निर्वाचित निकाय की ओर से दाखिल की गई थी। पूर्व निकाय की तरफ से पेश हुए कपिल सिब्बल ने कोर्ट से अपील की कि उनकी याचिका को बाकी याचिकाओं के साथ जोड़ा जाए। इस दौरान कोर्ट ने कहा कि NCLT और NCLAT पहले ही उस निकाय को हटा चुके हैं। अदालत ने पूछा कि याचिका सदस्य के तौर पर दाखिल की गई है या पूर्व समिति की ओर से।
Gymkhana Club Dispute: कपिल सिब्बल ने क्या दलील दी
सिब्बल ने अदालत में कहा कि सरकार को किसी संस्था या संपत्ति पर कब्जा लेने का अधिकार देने वाली शर्त संविधान की भावना के खिलाफ है। उन्होंने कहा, “एक बार सरकार परिसर में घुस गई तो फिर उन्हें अंदर आने का कोई अधिकार नहीं बनता।” सिब्बल ने यह भी तर्क दिया कि लीज का क्लॉज 4 ब्रिटिशकालीन “इंपीरियल सरकार” के दौर का है और संविधान लागू होने के बाद ऐसे प्रावधानों को अलग नजरिए से देखा जाना चाहिए।
केंद्र सरकार का पक्ष
केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार कानून के तहत तय प्रक्रिया का पालन करेगी और बिना प्रक्रिया अपनाए कब्जा नहीं लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि नियमों में मुआवजा देने या वैकल्पिक जमीन देने का भी प्रावधान मौजूद है। तुषार मेहता ने यह भी कहा कि “पहले वाली बॉडी जैसा कोई कॉन्सेप्ट नहीं है।”
Gymkhana Club Dispute: क्या है विवाद
केंद्र सरकार ने 22 मई को दिल्ली जिमखाना क्लब को नोटिस जारी कर 5 जून तक परिसर खाली करने को कहा था। इसके खिलाफ क्लब और उससे जुड़े पक्ष हाईकोर्ट पहुंचे हैं। अब मामले में अगली सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार अपना विस्तृत जवाब दाखिल करेगी।
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