New Delhi: उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री तथा महाराष्ट्र और गोवा के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी (भगतदा) को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु द्वारा पद्मभूषण सम्मान प्रदान प्रदान किये जाने के उपलक्ष्य में विभिन्न सामाजिक संगठनों और राजनीतिक पार्टियों के कार्यकर्ताओं ने प्रसन्नता व्यक्त की है। इसी क्रम में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली स्थित प्रेस क्लब में श्री कोश्यारी के सम्मान में 26 मई को एक भव्य अभिनंदन समारोह आयोजित किया गया। फैडरेशन ऑफ ऑल इंडिया व्यापार मंडल की ओर से आयोजित इस समारोह में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ, भारतीय जनता पार्टी एवं विभिन्न सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और साहित्यकारों ने भाग लिया। उत्तराखंड समाज के लोग भी इस कार्यक्रम में मौजूद रहे।
नींव की ईंट

18 की उम्र से ही पदयात्राएं शुरू कर दी
समारोह में राजनीतिक, सामाजिक और बौद्धिक संगठनों के प्रतिनिधियों की ओर से पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को फूल मालाएं एवं शॉल भेंटकर स्वागत किया गया। उत्तराखंड के परंपरागत वाद्य यंत्रों के साथ श्री कोश्यारी को कार्यक्रम में लाया गया। वक्ताओं ने उनके सम्मान में विचार व्यक्त करते हुए कहा कि भगतदा नींव की उन ईंटों में से एक प्रमुख हैं, जिन्होंने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और भाजपा को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने राष्ट्रीय स्वंय सेवक की मजबूती के लिए 18 साल की बहुत छोटी उम्र में ही गांव-गांव की पदयात्राएं शुरू कर दी थी। वे किसी पद की चाह के बिना अपने सीमित संसाधनों से निरंतर समाज सेवा में जुटे रहे, तो आरएसएस और भाजपा ने उनके कार्यों का महत्व समझा और उन्हें उचित राजनीतिक सम्मान भी दिया। भगतदा ने न सिर्फ अपने श्रम, बल्कि लेखनी के माध्यम से भी जनता की सेवा की।”पर्वत पीयूष” समाचार पत्र निकालकर उन्होंने जनता की ज्वलंत समस्याओं पर तत्कालीन सरकारों का ध्यान आकर्षित किया।इस पत्र के सारगर्भित संपादकीय काफी लोकप्रिय होते थे।
New Delhi: अच्छे विचारक
वक्ताओं ने कहा कि अंग्रेजी साहित्य में एम. ए. भगतदा चाहते तो सरकारी सेवा में जाकर आराम की जिंदगी बिता सकते थे।जिस दौर में उन्होंने उच्च शिक्षा हासिल की, उस वक्त तो हाईस्कूल पास व्यक्ति को भी आसानी से सरकारी नौकरी मिल जाती थी, लेकिन भगतदा ने लंबी लीकर खींची। उन्होंने संघर्ष और समाज सेवा का जो रास्ता चुना उसने बड़ी संख्या में युवाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। वे एक अच्छे विचारक हैं। ‘उत्तरांचल प्रदेश क्यों ?’ और ‘उत्तरांचल प्रदेश: संघर्ष एवं समाधान’ उनकी ऐसी पुस्तकें हैं जिन्होंने युवाओं को राज्य आंदोलन से जुड़ने और राज्य के विकास के लिए प्रेरणा देने का काम किया। उत्तराखंड के दूर-दराज के क्षेत्रों में शिक्षा के प्रचार-प्रसार और जनसेवा में उनकी उल्लेखनीय भूमिका रही है। सरकार ने उन्हें पद्मभूषण सम्मान देकर बहुत ही उचित कार्य किया है।

New Delhi: जनता का सम्मान
अभिनंदन समारोह में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए पद्मभूषण भगत सिंह कोश्यारी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश को निरंतर विकास की दिशा में आगे ले जा रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी एवं राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी की सोच और संकल्प का ही परिणाम है कि आज देश के दूर-दराज के इलाके भी सड़क से जुड़ चुके हैं। उन्होंने कहा कि युवा अवस्था में मैं संगठन के कार्यों से जिन सुदूर हिमालयी क्षेत्रों में पैदल जाया करता था आज वहां सड़कें बन चुकी हैं। आवागमन की सुविधाओं से विकास के नए रास्ते खुले हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के प्रति प्रधानमंत्री मोदी का इस कदर स्नेह है कि वे यहां की परंपरागत टोपी पहनकर विदेश यात्राएं करते हैं। वे चाहते हैं कि उत्तराखंड एक उन्नत राज्य बने।हम सबको मिलकर राज्य और देश के विकास के लिए काम करना होगा।
New Delhi: समर्पित भाव से सेवा करें
श्री कोश्यारी ने कहा कि मैंने कभी किसी सम्मान की चाह में जनसेवा नहीं की थी, लेकिन आज मेरी जनसेवा को सम्मान मिला है, तो यह अकेला मेरा नहीं, बल्कि समस्त जनता का सम्मान है। उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड के लोग पूरे समर्पण के साथ राष्ट्र और समाज की सेवा के लिए तत्पर रहते हैं।मैं युवा पीढ़ी को शुभकामनाएं देता हूं कि वे सदैव इसी समर्पित भाव से काम करते रहेंगे। समारोह में उत्तराखंड सरकार के दायित्वधारी पीसी नैनवाल, फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया व्यापार मंडल के वरिष्ठ पदाधिकारी सीए राजेश्वर पैन्यूली, डीपीएमआई के चेयरमैन डॉक्टर विनोद बछेती सहित कई अन्य गणमान्य लोगों ने विचार व्यक्त किये। कार्यक्रम का संचालन डॉ. सूर्यप्रकाश सेमवाल ने किया।








