Supreme Court: भारतीय चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद तृणमूल कांग्रेस की प्रतिक्रिया सामने आई है। तृणमूल कांग्रेस नेता और वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने कहा कि शीर्ष अदालत का फैसला केवल बिहार मामले तक सीमित है और इसे अन्य राज्यों पर सीधे लागू नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि उसकी टिप्पणियां विशेष रूप से बिहार में चल रही प्रक्रिया से जुड़ी हैं।
बिहार मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा पुनरीक्षण
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को चुनाव आयोग द्वारा बिहार में कराए जा रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को संवैधानिक और कानूनी रूप से वैध माना। न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने कहा कि केवल इस आधार पर इस प्रक्रिया को अवैध नहीं ठहराया जा सकता कि यह सामान्य मतदाता पुनरीक्षण प्रक्रिया से अलग है। अदालत ने माना कि चुनाव आयोग को मतदाता सूची की शुद्धता बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाने का अधिकार है।
Supreme Court: कल्याण बनर्जी बोले- नागरिकता तय करना आयोग का अधिकार नहीं
तृणमूल कांग्रेस नेता कल्याण बनर्जी ने फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि चुनाव आयोग किसी व्यक्ति की नागरिकता तय नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि यदि किसी मतदाता का नाम इस आधार पर हटाया जाता है कि वह गैर-नागरिक है, तो अंतिम निर्णय लेने का अधिकार चुनाव आयोग के पास नहीं है। उन्होंने दावा किया कि अदालत ने प्रक्रियागत सुरक्षा उपायों को पर्याप्त माना है, लेकिन साथ ही नागरिक अधिकारों की रक्षा पर भी जोर दिया है।
घुसपैठ विरोधी अभियान पर भी उठाए सवाल
पश्चिम बंगाल में चल रहे घुसपैठ विरोधी अभियानों के बीच कल्याण बनर्जी ने कहा कि किसी भी कार्रवाई में कानूनी प्रक्रिया और संवैधानिक अधिकारों का पालन जरूरी है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी माना है कि प्रक्रियागत सुरक्षा उपाय मौजूद हैं और उनका पालन होना चाहिए। टीएमसी नेता ने संकेत दिया कि आने वाले समय में यह मुद्दा पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों की राजनीति को प्रभावित कर सकता है।
Supreme Court: राजनीतिक बहस हुई तेज
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है। भाजपा इस फैसले को चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर मुहर बता रही है, जबकि विपक्षी दल इसे सीमित दायरे का आदेश बता रहे हैं। तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि किसी भी पुनरीक्षण प्रक्रिया में नागरिक अधिकारों और संवैधानिक प्रावधानों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए।








