PM MODI SANDESH: नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक संस्कृत सुभाषित साझा करते हुए दृढ़ निश्चय, आत्म-संयम और समय के सदुपयोग का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि यही वे गुण हैं, जो किसी भी व्यक्ति को सफलता की राह पर आगे बढ़ाते हैं और कठिन से कठिन चुनौतियों को भी आसान बना देते हैं।
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में लिखा, “दृढ़ निश्चय और आत्म-संयम वह शक्ति है, जो कठिन से कठिन राह को भी आसान बना देती है। आज हमारे युवा साथी इसी संकल्प के साथ राष्ट्र निर्माण में निरंतर जुटे हुए हैं।”
पीएम मोदी ने साझा किया संस्कृत श्लोक
प्रधानमंत्री ने यह संस्कृत सुभाषित साझा किया— “निश्चित्य यः प्रक्रमते नान्तर्वसति कर्मणः। अबन्ध्यकालो वश्यात्मा स वै पण्डित उच्यते॥”
PM MODI SANDESH: क्या है श्लोक का अर्थ?
इस श्लोक का अर्थ है कि जो व्यक्ति किसी कार्य को सोच-समझकर दृढ़ निश्चय के साथ शुरू करता है, उसे बीच में अधूरा नहीं छोड़ता, समय का सदुपयोग करता है और अपनी इन्द्रियों पर नियंत्रण रखता है, वही वास्तविक अर्थों में बुद्धिमान कहलाता है।
युवाओं को दिया प्रेरक संदेश
पीएम मोदी ने कहा कि आज देश के युवा इसी संकल्प और अनुशासन के साथ राष्ट्र निर्माण में योगदान दे रहे हैं। उन्होंने संकेत दिया कि सफलता के लिए केवल प्रतिभा ही नहीं, बल्कि आत्म-अनुशासन, निरंतरता और दृढ़ इच्छाशक्ति भी उतनी ही आवश्यक है।
PM MODI SANDESH: एक दिन पहले भी साझा किया था सुभाषित
इससे पहले सोमवार को भी प्रधानमंत्री ने शिक्षा और शिक्षकों की भूमिका पर आधारित एक संस्कृत श्लोक साझा किया था। उसमें उन्होंने बताया था कि जो व्यक्ति स्वयं किसी विषय में दक्ष होने के साथ-साथ दूसरों को भी प्रभावी ढंग से सिखाने की क्षमता रखता है, वही श्रेष्ठ शिक्षक कहलाने योग्य होता है। प्रधानमंत्री के ये नियमित सुभाषित भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृत साहित्य और जीवन मूल्यों को जनसामान्य तक पहुंचाने के प्रयास के रूप में भी देखे जा रहे हैं।
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