SIR Controversy: सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए नामों के मामले में चुनाव आयोग (EC), पश्चिम बंगाल सरकार और राज्य चुनाव आयोग से जवाब मांगा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि वोटर लिस्ट से किसी का नाम हटने का मतलब उसकी नागरिकता खत्म होना नहीं है और नागरिकता तय करने का अधिकार चुनाव आयोग के पास नहीं है।
SIR Controversy: क्या है पूरा मामला-
यह जनहित याचिका (PIL) पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस कमेटी की SIR समिति के चेयरमैन प्रसेनजीत बोस ने दायर की है। याचिका में मांग की गई है कि SIR प्रक्रिया के दौरान हटाए गए मतदाताओं से जुड़े दावे और आपत्तियों का विधानसभा क्षेत्रवार डेटा सार्वजनिक किया जाए।
SIR Controversy: कोर्ट ने किन जानकारियों की मांग की-
याचिका में फॉर्म-6, फॉर्म-6A और फॉर्म-7 से जुड़ा पूरा डेटा सार्वजनिक करने की मांग की गई है। इसमें आवेदन दायर होने, स्वीकार और खारिज होने की संख्या, साथ ही अपीलीय ट्रिब्यूनल में लंबित और निपटाए गए मामलों का विवरण शामिल है।
सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी-
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने कहा कि चुनाव आयोग नागरिकता तय करने वाली संवैधानिक संस्था नहीं है। यदि किसी ट्रिब्यूनल को किसी व्यक्ति की नागरिकता पर संदेह हो, तो मामला नागरिकता अधिनियम के तहत केंद्र सरकार के संबंधित मंत्रालय को भेजा जाना चाहिए।
ट्रिब्यूनलों की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल-
प्रसेनजीत बोस की ओर से वरिष्ठ वकील गोपाल शंकर नारायणन ने अदालत को बताया कि हटाए गए मतदाताओं के दावों और आपत्तियों की सुनवाई के लिए बनाए गए 18 ट्रिब्यूनलों में भारी देरी और व्यावहारिक समस्याएं सामने आ रही हैं।
उन्होंने कहा कि करीब 33.5 लाख अपीलें अभी भी लंबित हैं, जबकि जिन मामलों का निपटारा हुआ है उनमें लगभग 70 प्रतिशत दावे स्वीकार किए गए हैं। उनका तर्क था कि लंबित मामलों के कारण कई लोगों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने में भी दिक्कतें आ रही हैं।
याचिका में क्या दावा किया गया-
याचिका के अनुसार, पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया के दौरान 58 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम प्रारंभिक चरण में हटाए गए। इसके बाद नाम जोड़ने के लिए 9.64 लाख आवेदन (फॉर्म-6 और 6A) तथा नाम हटाने के लिए 99 हजार से अधिक आवेदन (फॉर्म-7) प्राप्त हुए। हालांकि, अंतिम मतदाता सूची में केवल 1.82 लाख नए नाम ही जोड़े गए।
अगली सुनवाई कब होगी-
सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को SIR मामले से जुड़ी अन्य लंबित याचिकाओं, जिनमें पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की याचिका भी शामिल है, के साथ 25 अगस्त को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।
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