कांग्रेस ने बताया संवैधानिक अधिकार
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि लोकतंत्र में किसी भी प्रकार के अन्याय के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करना हर नागरिक और राजनीतिक दल का संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस के नेताओं पर लगातार हमले हुए हैं और पार्टी कार्यालयों को भी निशाना बनाया गया है। उनके अनुसार ऐसी घटनाएं लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए चिंता का विषय हैं। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों को एकजुट होकर ऐसी घटनाओं के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक विरोधियों को दबाने की कोशिशें लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करती हैं।
Mamata Banerjee: तृणमूल नेताओं पर हमलों का मुद्दा
कांग्रेस ने तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं पर हुए कथित हमलों का भी जिक्र किया। पार्टी का कहना है कि सांसदों और कार्यकर्ताओं को निशाना बनाए जाने से राजनीतिक माहौल में तनाव बढ़ा है। कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि इन घटनाओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। तृणमूल कांग्रेस भी लगातार यह आरोप लगा रही है कि उसके नेताओं और समर्थकों को राजनीतिक कारणों से निशाना बनाया जा रहा है। इसी मुद्दे को लेकर पार्टी नेतृत्व ने विरोध प्रदर्शन का रास्ता अपनाया है।
भाजपा ने धरने को बताया राजनीतिक नौटंकी
भाजपा नेताओं ने ममता बनर्जी के धरने पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस जनता का विश्वास खो चुकी है और धरने का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। उनका कहना है कि राज्य की जनता अब सरकार के कामकाज का हिसाब मांग रही है। भाजपा नेता लॉकेट चटर्जी ने भी दावा किया कि जनता में तृणमूल कांग्रेस के प्रति नाराजगी बढ़ी है। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियां राज्य की राजनीतिक दिशा में बदलाव का संकेत दे रही हैं। इसी के साथ पश्चिम बंगाल की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज हो गया है।
ये भी पढ़ें… राजस्थान राज्यसभा चुनाव: नामांकन शुरू, उम्मीदवारों पर भाजपा-कांग्रेस में मंथन








