Monalisa Case: महाकुंभ मेले के दौरान सोशल मीडिया पर चर्चित हुईं मोनालिसा भोसले और उनके पति मोहम्मद फरमान खान से जुड़े मामले में केरल उच्च न्यायालय ने अग्रिम जमानत याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। इस मामले में बुधवार को आदेश सुनाए जाने की संभावना जताई जा रही है। अंतरधार्मिक विवाह, आयु विवाद और कथित अपहरण के आरोपों के कारण यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है।
सुनवाई के दौरान अदालत की महत्वपूर्ण टिप्पणी
न्यायमूर्ति कौसर एडप्पागथ की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रखा। सुनवाई के दौरान अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि दंपति को मध्य प्रदेश में कथित धमकियों का सामना करना पड़ रहा था, तो केरल में होना उनके लिए सौभाग्य की बात है। इस पर दंपति के अधिवक्ता ने कहा कि यही कारण है कि वे आज सुरक्षित हैं। मोनालिसा भोसले वर्ष 2025 के महाकुंभ मेले के दौरान मनकों की मालाएं बेचते हुए वायरल वीडियो के कारण देशभर में चर्चा में आई थीं। बाद में उन्होंने केरल में मोहम्मद फरमान खान से विवाह किया, जिसके बाद यह विवाह विवादों में घिर गया।
Monalisa Case: आयु और विवाह की वैधता पर उठा विवाद
दंपति की ओर से पेश अधिवक्ता ने अदालत में दावा किया कि विवाह के समय मोनालिसा (Monalisa) बालिग थीं और उन्हें नाबालिग साबित करने के लिए सरकारी अभिलेखों में कथित बदलाव किए गए। वहीं, मध्य प्रदेश सरकार ने अदालत को बताया कि उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार मोनालिसा की जन्मतिथि दिसंबर 2009 है, जिससे विवाह के समय उनकी आयु कानूनी सीमा से कम थी। राज्य सरकार ने यह भी तर्क दिया कि विवाह की वैधता पर प्रश्न उठते हैं क्योंकि विवाह हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न हुआ, जबकि दूल्हा मुस्लिम समुदाय से संबंधित है।
जालसाजी और अपहरण के आरोपों की भी जांच
सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि फरमान खान के विरुद्ध दर्ज कथित अपहरण मामले में जालसाजी से जुड़े आरोप भी जोड़े जा सकते हैं। आरोप है कि जन्म प्रमाणपत्र और विवाह प्रमाणपत्र प्राप्त करने के लिए कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों का उपयोग किया गया। हालांकि अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि कथित पीड़िता ने स्वयं अपने पति के खिलाफ कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई है। इस बीच केरल और मध्य प्रदेश में समानांतर कानूनी कार्यवाहियां जारी हैं। मामले में कुछ राजनीतिक व्यक्तियों की कथित भूमिका को लेकर भी अलग शिकायतें दायर की गई हैं। वहीं बता दें कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता, अंतरधार्मिक विवाह, आयु निर्धारण और आपराधिक दायित्व जैसे संवेदनशील कानूनी पहलुओं से जुड़े इस मामले में उच्च न्यायालय का आगामी फैसला बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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